छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास
Rural Development in Chhattisgarh
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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास - (हिन्‍दी में)

Rural Development in Chhattisgarh - (In English)

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास

ग्रामीण विकास का अर्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुधार और साथ ही समाजिक बदलाव. ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य है ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाना. विकास के लिए मुख्य रूप से कृषि, उद्योग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और आजीविका आदि क्षेत्रों पर दिया जाता है. यह समझ भी विकसित हुई है कि त्वरित विकास सरकारी प्रयासों के साथ जमीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी से ही संभव है.

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास का कार्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग व्दारा किया जाता है.

सहस्राब्दी विकास लक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्ष २००० के सहस्राब्दी शिखर सम्मेलन में २०१५ तक के लिये ८ वैश्विक विकास लक्ष्य निर्धारित किये गये थे जिन्हें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य' (Millennium Development Goals (MDGs)) कहा जाता है। संयुक्त राष्‍ट्र के उस समय के १८९ सदस्य राष्ट्रों तथा २२ अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं ने २०१५ तक निम्नलिखित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये संकल्प लिया-

  1. भूखमरी तथा गरीबी को समाप्त करना
  2. सार्वजनिक प्राथमिक शिक्षा
  3. लिंग समानता तथा महिला शसक्तीकरण
  4. शिशु-मृत्यु दर घटाना
  5. मातृत्व स्वास्थ्य को बढ़ावा देना
  6. HIV/AIDS, मलेरिया तथा अन्य बीमारियों से छुटकारा पाना
  7. पर्यावरण सततता
  8. वैश्विक विकास के लिए संबंध स्थापित करना

भारत ने लक्षित लक्ष्यों में से HIV/AIDS, गरीबी, सार्वजनिक शिक्षा तथा शिशु मृत्यु दर में निर्धारित मानकों को 2015 तक प्राप्त कर लिया है जबकि अन्य लक्ष्यों में भारत अभी भी पीछे है.

संधारणीय विकास लक्ष्य

संधारणीय विकास लक्ष्य (अंग्रेज़ी: Sustainable Development Goals, संक्षिप्‍त रूप में SDG) भविष्य के अंतरराष्ट्रीय विकास के लक्ष्य सेट हैं. इन्हें संयुक्त राष्ट्र ने बनाया है. 2015 के अंत में सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों के समाप्त हो जाने पर ये उनको प्रतिस्थापित कर रहे हैं. यह लक्ष्य 2015 से 2030 तक चलेंगे. इनमें 17 लक्ष्य और 169 विशिष्ट लक्ष्य हैं.

अगस्त 2015 में 193 देश निम्नलिखित 17 लक्ष्यों पर सहमत हुए -

  1. पूरे विश्व से गरीबी के सभी रूपों की समाप्ति
  2. भूख की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा
  3. सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा
  4. समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना
  5. लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना
  6. सभी के लिए स्वच्छता और पानी के सतत प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना
  7. सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करना
  8. सभी के लिए निरंतर समावेशी और सतत आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोजगार, और बेहतर कार्य को बढ़ावा देना
  9. लचीले बुनियादी ढांचे, समावेशी और सतत औद्योगीकरण को बढ़ावा
  10. देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना
  11. सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण
  12. स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना
  13. जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करना
  14. स्थायी सतत विकास के लिए महासागरों, समुद्र और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग
  15. सतत उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना
  16. सतत विकास के लिए शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेह बनना ताकि सभी के लिए न्याय सुनिश्चित हो सके
  17. सतत विकास के लिए वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्ति कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत बनाना

समाजिक समावेशन

भारतीय संविधान में समता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं व्यक्ति की गरिमा (Dignity Of Person) महत्व दिया गया है. हमारा संविधान जाति, वर्ग, धर्म, आय एवं लैंगिक आधार पर किसी भी प्रकार के विभेद का निषेध करता है.

संविधान के अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष बराबरी; अनुच्छेद 15 – विभेद का निषेध; अनुच्छेद 16 – अवसर की समानता; अनुच्छेद 17 – अस्पृष्ता का उनमूलन, अनुच्छेद 21 – जीवन एवं व्यक्तिगत स्व्तंत्रता का संरक्षण और अनुच्छेद 23 तथा 24 – आर्थिक सुरक्षा के प्रावधान है जो समावेशी समाज बनाने के लिये हैं.

इस परिप्रेक्ष्य में प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक, जातिगत, आर्थिक, वर्गीय, लैंगिक, शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से भिन्न देखे जाने के बजाय एक स्वत्रंत व्यक्तित्व के रूप में देखे जाने की आवश्यकता है, जिससे लोकत्रांतिक समाज में व्यक्ति के समुचित समावेशन हेतु वातावरण का सृजन किया जा सके. समावेशन की ठोस प्रक्रिया प्रतीकात्मक लोकतंत्र से भागीदारी आधारित लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त करती है. समावेशी समाज का विकास उसमें निहित सम्पूर्ण मानवीय क्षमता के कुशलतापूर्वक उपभोग पर निर्भर करता है. समाज के सभी वर्गों की सहभागिता के बिना समावेशी समाज का विकास सम्भव नहीं हो सकता है. शि‍क्षा समावेशन की प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण औजार है. समावेशी समाज में सभी को विकास के समान अवसर उपलब्ध होते हैं.

वित्तीय समावेशन

वित्तीय समावेशन (फाइनेंशयल इन्क्लूजन) का मतलब समाज के पिछड़े एवं कम आय वाले लोगों को वहन करने योग्य मूल्य पर वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना है. कुछ प्रमुख वित्तीय सेवाएं हैं - ऋण, भुगतान, धनप्रेषण और बीमा सुविधाएं. बैंकों की सुविधा से वंचित लोग अनौपचारिक बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ने के लिये बाध्य हो जाते हैं, जिनमे ब्याज़ की दरें भी अधिक होती हैं और उधार दी गई राशि की मात्रा भी काफी कम होती है. वित्तीय समावेशन के परिणामस्वरूप उपलब्ध बचत राशि में वृध्दि होती है, और नए व्यावसायिक अवसर प्राप्त होते है. वित्तीय समावेशन के लिये सरकार की सबसे बड़ी योजना जन धन योजना है -

जन-धन योजना - बैंकिंग सेवाओं की पहुँच में वृद्धि करने और यह सुनिश्चित करने के लिये कि सभी परिवारों के पास कम से कम एक बैंक खाता हो, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन-धन योजना नामक एक राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन की घोषणा की गई.

  1. इस योजना को 28 अगस्त्, 2014 को औपचारिक रूप में शुरू किया गया.
  2. अगस्त, 2017 के मध्य तक इस योजना के अंतर्गत तकरीबन 29.48 करोड़ बैंक खाते खोले गए, जो अपने-आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
  3. इन खातों में से तकरीबन 17.61 करोड़ खाते ग्रामीण/अर्धशहरी क्षेत्रों और शेष 11.87 करोड़ खाते शहरी क्षेत्रों में खोले गए.
  4. जन-धन योजना के तहत खाता खोलने पर मिलने वाले अतिरिक्त लाभ –
    1. ग्राहक को एक रुपे (RUPAY) डेबिट कार्ड ज़ारी किया जाता है जिसमें 1 लाख रुपये का बीमा कवर होता है.
    2. इसके अतिरिक्ता, खाते को छ: महीने तक संतोषजनक रूप में संचालित करने पर ग्राहक को 5,000 रुपए की ओवर ड्राफ्ट सुविधा भी प्रदान की जाती है.
    3. ग्राहकों को एक विशेष समय तक खाता खोले रखने के लिये 30,000 रुपए का जीवन बीमा भी दिया गया है.

अभिसरण

भारत सरकार और राज्य सरकारों की अनेक योजनाओं के लक्ष्य और कार्य आपस में मिलते-जुलते हैं. स्थानीय स्तर पर यदि इन योजनाओं से मिलने वाले लाभ को सभी लागों तक पहुंचाने के लिये योजनाबध्द तरीके से सभी योजनाओं को मिलाकर कार्य किया जाये तो सभी योजनाओं के बेहतर परिणाम मिलेंगे और लोग भी विकास के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकेगे. इसी को अभिसरण या कंवर्जेंस कहते हैं. उदाहरण के लिये कौशल विकास योजनाओं से लोगों में कौशल विकासित करके उन्हे स्वारोज़गार योजनाओं के माध्यम से ऋण दिलाया जा सकता है जिससे वे अपने कौशल का उपयोग स्वोरोज़गार में करके अपनी आय में वृध्दि कर सकें. इसी प्रकार जिन क्लस्टरों में स्वारोज़गार की योजनाओं से अधिक लोगों को ऋण दिलाया गया है वहां अधोसंरचना विकास की योजनाओं से बिजली, पानी, सड़क आदि की व्यवस्था की जा सकती है. यह सभी अभिसरण के उदाहरण हैं.

भारत सरकार की ग्रामीण विकास की योजनाएं

  1. रोज़गार देने के लिए महात्मा गाँधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) (विस्त्र्त विवरण नीचे है)
  2. स्व रोज़गार और कौशल विकास के लिए दीन दयाल अंत्योदय योजना - नेशनल रूरल लाइवलीहुडस मिशन (एनआरएलएम) (विस्त्रयत विवरण नीचे है)
  3. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना-
    1. राज्य के सभी ज़ि‍लों में लागू.
    2. 15 से 35 वर्ष आयु के ग्रामीण गरीबी रेखा के नीचे के युवा इसमें पात्र हैं. महिलाओं, अति पिछड़ी जनजातियों, दिव्यांगों, पुनर्वासित बंधुआ मजदूरों, किन्नरों के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष है.
    3. 17,976 हितग्राहियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य है.
    4. अभी तक 19,222 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और 6,321 युवाओं को नियोजित किया जा चुका है.
    5. रोशनी कार्यक्रम – 8 नक्सल प्रभावित ज़ि‍लों (बस्तर संभाग के 7 ज़ि‍ले और बलरामपुर) में लागू. सभी प्रावधान दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना के समान.
    6. आर-सेटी (R-SETI) – लीड बैंक के माध्यम से बी.पी.एल. हितग्राहियों को गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण के लिये अवासीय संस्थान (Rural Self Employment Training Institute)
  4. मिशन अंत्योदय-
    1. भारत सरकार ने इस मिशन के अंतर्गत देश की 50,000 पंचायतों को गरीबी से मुक्त करके समेकित विकास का लक्ष्य रखा गया है.
    2. निर्धारित मानकों के अनुसार छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण में वर्ष 2020 तक 2287 पंचायतों को गरीबी से मुक्त कराने का लक्ष्य है.
    3. चिन्हांकित पंचायतों में बेस लाइन सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है.
  5. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी रूर्बन मिशन (विस्त्रत विवरण नीचे है)
  6. सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) -
    1. 11 अक्टूबर 2014 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जयंती से प्रारंभ.
    2. प्रत्येक सांसद को 2016 तक 1 तथा 2019 तक 3 ग्राम पंचायतों का चयन करके उन्हें आदर्श बनाना है.
    3. किये जाने वाले कार्य –
      1. मानव विकास – शिक्षा, स्वास्‍थ्‍य, पोषण एवं स्वोरोज़गार
      2. सामाजिक विकास एवं सामाजिक सुरक्षा – श्रमदान को बढ़ावा, सभी प्रकार की पेंशन, सर्वाजनिक वितरण प्रणाली, बीमा योजनाएं, जनधन योजना
      3. सुशासन – कामन सर्विस सेंटर से 100 से अधिक सेवाएं
      4. आर्थिक विकास – कृषि, स्वारोज़गार, कौशल प्रशिक्षण
      5. अधोसंरचना विकास – बिजली, पानी, सड़क, भवन
  7. प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण (विस्त्रत विवरण नीचे है)
  8. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पी एम जी एस वाई) -
    1. 12.12.2000 से प्रारंभ
    2. सामान्य क्षेत्रों में 500 तथा आई.ए.पी. क्षेत्रों मे 250 या इससे अधिक आबादी की बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जाड़ने का उद्देश्य है
    3. 21.12.2017 तक 7144 सड़के, कुल लंबाई- 32132 कि.मी., 281 पुल निर्मित; कुल व्यय 9957 करोड़; 8828 बसाहटें बारहमासी सड़कों से जुड़ी.
  9. चौदहवां वित्त आयोग - राशि सीधे पंचायतों के खातों में जमा हेाती है. 10 लाख रुपये प्रति पंचायत मिलते हैं, जिनका व्यय पेयजल, स्वच्छता, ठोस अपशि‍ष्ट प्रबंधन एवं परिसंपत्तियों के रखरखाव पर किया जाता है.
  10. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान - शत-प्रतिशत केन्द्र पोषित योजना है. वर्ष 2016-17 से प्रारंभ. अभी तक 42 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. इसका उपयोग हमर गांव हमर योजना में किया गया है. इसके अंतर्गत त्रि-स्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, शासकीय अधिकारियो, स्वयं सेवी संगठनों आदि में क्षमता विकास के लिये प्रशिक्षण आयोजित किया गया है.
  11. बीमा योजनाएं -
    1. आम आदमी बीमा योजना- ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों के लिए – कुल प्रीमियम 200 रुपये (100 रुपये केन्द्र तथा 100 रुपये राज्य सरकार व्दारा); पात्रता एस.ई.सी.सी. सूची में शामिल होना चाहिए, आयु 18 से 59 वर्ष; लाभ – मृत्यु पर 75,000 रुपये और अंग भंग पर 37,500 रुपये
    2. अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजना -लधु एवं सीमान्त कृषकों तथा खेतिहर मजदूरों के लिये; शेष सब कुछ आम आदमी बीमा के समान
    3. प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना- 1.05.2015 से प्रारंभ; आयु 18 से 50 वर्ष; प्रतिवर्ष 230 रुपये प्रीमियम; मृत्यु पर 2 लाख का कवरेज, गरीबी की रेखा के नीचे एवं कम आय वर्ग के लोगों के लिये
    4. प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना-18 से 70 वर्ष आयु के लिये; 12 रुपये प्रतिवर्ष प्रीमियम; दुर्घटना की दशा में 2 लाख रुपये की बीमा राशि मिलेगी
    5. अटल पेंशन योजना - 60 वर्ष पूरा होने पर 1000 रुपये से 5000 रुपये प्रति माह पेंशन हितग्राही के अंशदान के अनुसार; प्रात्रता 18 से 40 वर्ष; असंगठित क्षेत्र के हितग्राहियो हेतु; प्रीमियम में हितग्राही अंशदान 500 रुपये प्रतिमाह और केन्द्र सरकार का अंशदान 500 रुपये प्रतिमाह
  12. स्वच्छ भारत मिशन (विस्त्रत विवरण नीचे है)

छत्‍तीसगढ़ सरकार की योजनाएं

  1. छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’- छत्तीसगढ़ राज्य में दिनांक 1 अप्रेल 2013 को स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्व रोज़गार योजना को समाप्त करते हुए बिहान के नाम से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन प्रारंभ किया गया है. विश्व बैंक की सहायता प्राप्त यह योजना 85 ब्लाकों में संचालित है जिसमें 11.66 लाख गरीब परिवार लाभांवित हैं और 1,13,600 स्व-सहायता समूह गठित किए गए हैं. योजना में चिन्हांकित समूहों को चक्रीय निधि तथा सामुदायिक निवेष कोष बैंक क्रेडिट लिंकेज से उपलब्ध कराई जाती है. चक्रीय निधि से समूह के भीतर आंतरिक उधार दिया जाता है. सामुदायिक विकास कोष से समूह की जीविकोपार्जन संबंधी गतिविधियां की जाती हैं. अभी तक 1012 करोड़ रुपये की राशि प्रदत्त की जा चुकी है.
  2. मुख्य मंत्री ग्राम सड़क विकास योजना’-
    1. सामान्य विकास खंडों में 250 या उससे अधिक की बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना
    2. 23 अप्रेल 2011 से प्रारंभ; अब तक 1385 सड़कें; 4380 कि.मी. की कुल लंबाई; 2170 करोड़ रुपये स्वीक्रत
  3. मुख्योमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना -
    1. ग्राम की आंतरिक सड़कों का निर्माण (सी.सी. रोड नाली के साथ)
    2. अप्रेल 2012 से प्रारंभ
    3. अब तक कुल 6211 सड़कें, कुल लंबाई 1870 कि.मी. 1124 करोड़ रुपये व्यय
  4. विधायक आदर्श ग्राम योजना -सांसद आर्दश ग्राम योजना के समान. 2 वर्षों में 180 ग्राम पंचायतें चिन्हित की गईं.
  5. ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान- अक्टूबर 2001 से प्रारंभ. स्था‍नीय शासन के विभिन्न स्तर के नवनिर्वाचित जन प्रतिनिधियों को लोक सेवा की क्षमता विकास के लिये प्रशिक्षण. पर्यावरण एवं संसाधनों का बेहरत प्रबंधन करते हुए समावेशी एवं संवहनीय विकास तथा सुशासन के लिये प्रशिक्षण.
  6. श्रध्दांजलि योजना - 1 जुलाई 2016 से प्रारंभ; एस.ई.सी.सी. सूची में शामिल वंचित परिवार के मुखि‍या या कमाऊ सदस्य की मृत्यु पर उसके अंतिम संस्कार के लिए तात्कालिक सहायता हेतु 2000 रुपये दिये जाते हैं. इसका दायित्व सरपंच और ग्राम सचिव का है.
  7. ज़रूरतमंदो के लिये अनाज व्यवस्था - ज़रूरतमंद गरीब व्यक्तियों को नि:शुल्क 5 किलो अनाज देने के लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक क्विंटल आनाज उपलब्ध रखा जाता है.
  8. मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना - 2014 से प्रारंभ. ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत एवं मौलिक सुविधाओं के लिये स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचनाओं का निर्माण इसका उद्देश्य है. ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष अधिकतम 20 लाख रुपये तक के कार्य स्वीक्रत किये जा सकते हैं. अब तक 1630 करोड़ के कार्य स्वीक्रत एवं 33,577 कार्य पूर्ण.
  9. अटल समरसता योजना - 3000 से अधिक आबादी बाले गांवों में सामाजिक कार्य सहजता से करने एवं समाज के विभिनन वर्गो में समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से आरंभ. 20 लाख रुपये तक की लागत के कार्य किये जाते हैं.
  10. मिनी स्टेडियम निर्माण - 3000 से अधिक आबादी वाले गांवों में जहां 3-5 एकड़ शासकीय भूमि उपलब्ध हो वहां ग्रामीण युवाओं को खेलों के प्रति जागरूक करने के लिये 50 लाख की लागत से मिनी स्टेडियम बनाए जाते हैं.
  11. स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना - 15 से 35 वर्ष आयु के ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में सामाजिक चेतना विकसित करने के लिये, व्याक्तित्व निर्माण के लिये एवं सर्वागीण विकास के लिये युवाओ के बीच एकता स्थापित करने के उद्देश्य से संचालित है.
  12. स्वा‍मी आत्मानंद वाचनालय - ग्राम पंचायत स्तर पर वाचनलय की स्थापना; समाचार पत्र एवं सम-सामयिक विषयों पर पुस्तके रखी जाती हैं.
  13. हमर छत्तीसगढ़ योजना -1 जुलाई 2016 से आरंभ. इसे 30 जून 2018 तक चलाया जाना था परन्तु अब इसके समय में 30 सितंबर 2018 तक की वृध्दि कर दी गई है. 27 ज़ि‍लों की 10976 पंचायतों तथा 111 नगर-पंचायतों के 2 लाख प्रतिनिधियों को 2 दिन के रायपुर प्रवास पर लाने का लक्ष्य निर्धारित था. अब तक 1.50 लाख से अधिक प्रतिनिधि रायपुर भ्रमण पर आ चुके हैं. रायपुर में उन्हें विधान सभा, मंत्रालय, इंदिरा गाधी कृषि विश्वविद्यालय, साइंस सेंटर, बाटनिकल गार्डन, जंगल सफारी, पुरखौती मुक्तांमगन, हवाई अड्डा, संग्रहालय, क्रिकेट स्टेडियम आदि का भ्रमण कराया जाता है.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा)

उद्देश्य‍ - यह योजना महात्मा गांधी ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनयिम, 2005 के अंतगर्त संचालित है. इस अधिनियम में प्रावधान है कि ऐसे प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रमकार्य करना चाहते हैं, को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्त रोज़गार उपलब्ध, कराया जाएगा.

लक्ष्य

  1. रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराके ग्रामीण भारत में रहने वाले सर्वाधिक लाभवंचित लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा.
  2. टिकाऊ स्वरूप की परिसंपत्तियों के सृजन, उन्नत जल सुरक्षा, मृदा संरक्षण और उच्च भूमि उत्पादकता के जरिये निर्धनों के लिये आजीविका सुरक्षा.
  3. ग्रामीण भारत में सूखा रोधन और बाढ़ नियंत्रण.
  4. अधिकार आधारित कानूनी प्रक्रिया के जरिए सामाजिक रूप से लाभवंचित, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को अधिकार संपन्न बनाना.
  5. विभिन्न गरीबी उपशमन और आजीविका संबंधी पहलों में तालमेल के जरिए विकेंद्रीकृत, भागीदारी-पूर्ण नियोजन को सुदृढ़ करना.
  6. पंचायती राज संस्थाओं को सुदृढ़ करके जमीनी स्तरों पर लोकतंत्र को मजबूत करना.
  7. शासन में बेहतर पारदर्शिता और जवाबदेही लाना.

कवरेजमनरेगा संपूर्ण देश में लागू है. इसमें उन जिलों को छोड़ दिया गया है जहां शत-प्रतिशत शहरी आबादी है.

प्रतिमानात्मक बदवाल

  1. मनरेगा ने मानव इतिहास में सबसे विशाल रोजगार कार्यक्रम को सफल बनाया है और यह अपनी व्यापकता, संरचना और उद्देश्य में किसी अन्य मजदूरी रोजगार कार्यक्रम से अलग है. इसकी बॉटम-अप, जन-केंद्रित, मांग आधारित, स्व-चयनित, अधिकार आधारित डिजाइन विशिष्ट और अद्वितीय है.
  2. मनरेगा में मजदूरी रोजगार को कानूनी गारंटी दी गई है.
  3. यह मांग आधारित कार्यक्रम है जहां कार्य का प्रावधान मजदूरी मांगने वाले व्यक्तियों द्वारा की गई कार्य की मांग से प्रेरित होता है.
  4. मांग किए जाने पर कार्य उपलब्ध न कराए जाने तथा किए गए कार्य के लिए मजदूरी के भुगतान में विलंब होने की स्थिति में भत्ता और मुआवजा दोनों का कानूनी प्रावधान है.
  5. मनरेगा लाभार्थियों के चयन की स्व-लक्षित व्यवस्था के जरिए लक्ष्यीकरण की समस्याओं को दूर करता है अर्थात् बड़ी संख्या में अत्यंत निर्धन और सीमांत व्यक्तियों को इस योजना के अंतर्गत रोजगार मिलता है.
  6. अधिनियम राज्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि कार्यक्रम की शत-प्रतिशत अकुशल श्रम लागत और 75 प्रतिशत सामग्री लागत का वहन केन्द्र व्दारा किया जाता है.
  7. पूर्ववर्ती आबंटन आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रमों से परे मनरेगा मांग आधारित है और प्रत्येक राज्य में रोजगार की मांग के आधार पर केन्द्र से राज्यों को संसाधन का अंतरण किया जाता है. इससे राज्यों को निर्धनों की रोजगार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अधिनियम का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है.
  8. समय पर कार्य उपलब्ध कराने में असफल रहने पर सहवर्ती वित्तीय निरुत्साहन का भी प्रावधान है क्योंकि तब राज्यों को बेरोजगारी भत्ते की लागत का वहन करना पड़ता है.
  9. लागत के हिसाब से कम से कम 50प्रतिशत कार्यों का कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों व्दारा किया जाएगा. ग्राम पंचायतों को वित्तीय संसाधनों के प्रत्यायोजन का यह क्रम अभूतपूर्व है.
  10. शुरू किए जाने वाले कार्यों के स्वरूप और चयन से संबंधित योजनाओं और फैसलों, प्रत्येक कार्य को शुरू किए जाने वाले क्रम, स्थान का चयन आदि पर निर्णय ग्राम सभा की खुली बैठकों में किया जाएगा तथा ग्राम पंचायत इसकी अभिपुष्टि करेगी. प्रशासनिक अनुमति दिए जाने से पहले ग्राम सभा मध्यवर्ती पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर निविष्ट किए गए कार्यों को अनुमोदित करेगी और उनका क्रम निर्धारित करेगी. ग्राम सभा उन्हें स्वीकृत, संशोधित या अस्वीकृत कर सकती है.
  11. उच्चतम प्राधिकरण इन निर्णयों को रद्द नहीं कर सकता है. वे केवल अधिनियम और इसके परिचालन दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुपालन की सीमा सुनिश्चित कर सकते हैं.
  12. इस बॉटम-अप, जन-केंद्रित, मांग आधारित संरचना का यह आशय भी है कि मनरेगा की सफलता के लिए जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा मजदूरी मांगने वालों, ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों के पास है.
  13. मनरेगा समेकित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका सृजन परिप्रेक्ष्य में पूर्व के राहत कार्यक्रमों से भी मुक्ति दिलाता है.
  14. सामाजिक लेखा परीक्षा एक नई विशेषता है जो मनरेगा का एक अभिन्न हिस्सा है. संभवतः यह विशेष रूप से नए स्टेकहोल्डरों के लिए निष्पादन की एक अभूतपूर्व जवाबदेही तय करता है.
  15. मनरेगा के परिणामों पर केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद (सीईजीसी) द्वारा तैयार की गई वार्षिक रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष केन्द्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत की जाती है. इसी प्रकार राज्य रोजगार गारंटी परिषदों व्दारा तैयार की गई वार्षिक रिपोर्टें राज्य सरकारों व्दारा राज्य विधानमंडलों में प्रस्तुत करनी होती है ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों को निरीक्षण करने में मदद मिल सके.

मुख्य स्टेकहोल्डर

  1. मजदूरी मांगने वाले
  2. ग्राम सभा - ग्राम सभा मजदूरी मांगने वालों की बातें सुनने और उनकी मांगों को पूरा करने का प्रमुख मंच है. यह सामाजिक लेखा परीक्षा कराने का भी प्रमुख मंच है.
  3. त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाएं, विशेषकर ग्राम पंचायत
  4. ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी (पी.ओ.)
  5. जिला कार्यक्रम समन्वयक (डी.पी.सी.)
  6. राज्य सरकार - मनरेगा की धारा 12 के तहत प्रत्येक राज्य सरकार एक राज्य रोजगार गारंटी परिषद (एसईजीसी) (या राज्य परिषद) की स्थापना करेगी.
  7. ग्रामीण विकास मंत्रालय - केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद (सीईजीसी) (या केन्द्रीय परिषद) की स्थापना की गई है.
  8. सिविल सोसायटी - जमीनी स्तरों पर कार्य कर रहे सिविल सोसायटी संगठन (सीएसओ) मजदूरी मांगने वालों में जागरुकता सृजित करने और मनरेगा के नियोजन, कार्यान्वयन और सामाजिक लेखा परीक्षा में ग्राम पंचायतों और राज्य सरकारों की सहायता करने एवं उनकी क्षमता निर्माण में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. स्व-सहायता समूह जागरुकता फैलाने, कार्य के आयोजन, हकदारियां तय करने और सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभा सकते हैं. अध्याय-9 में इन कार्यों में सीएसओ को तैनात करने वाले फ्रेमवर्क का वर्णन किया गया है.
  9. अन्य स्टेकहोल्डर (अर्थात् लाइन विभाग, कन्वर्जेंस विभाग, स्व-सहायता समूह आदि)

बेरोजगारी भत्ता यदि आवेदक को रोजगार की मांग से संबंधित उसके आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो वह दैनिक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा. बेरोजगारी भत्ता का भुगतान इस अधिनियम की धारा 7 के अनुसार किया जाएगा. बेरोजगारी भत्ता प्रथम 30 दिनों के लिए मजदूरी दर के एक चौथाई हिस्से से कम नहीं होगा और वित्त वर्ष की शेष अवधि के लिए मजदूरी दर के आधे हिस्से से कम नहीं होगा.

योजनांतरगत किए जाने वाले कार्य

  1. प्राकृतिक संसाधन प्रबंध
  2. दुर्बल वर्गों (अजा/अजजा/बीपीएल परिवार/ दिव्यांग जन) के हित के व्यक्ति‍मूलक कार्य भूमि उत्पादकता में सुधार आदि के कार्य जिनमे कृषि, उद्यानिकी, रेशम, पौधारोपण आदि शामिल हैं.
  3. एन.आर.एल.एम. एवं स्व-सहायता समूहों हेतु समान्यन अधोसंरचनाओं का सृजन
  4. ग्रामीण अधोसंरचनाओं का निर्माण और रखरखाव

उपलब्धियां

  1. वित्त वर्ष 2017-18 में 48,000 करोड़ रुपए का आवंटन मनरेगा के तहत अब तक का सर्वाधिक आवंटन है.
  2. वर्ष 2017-18 में अब तक 4.35 करोड़ परिवारों को 156 लाख कार्यों में रोज़गार प्रदान किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 160 करोड़ दिन का रोज़गार सृजित हुआ है। कुल रोज़गार में से 54% रोज़गार महिलाओं के लिये सृजित हुआ है जो वैधानिक तौर पर आवश्यक 33% से बहुत अधिक है.
  3. वर्ष 2017-18 में अब तक कुल व्यय का तकरीबन 60% प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों (एनआरएम) में हुआ है। वर्ष 2017-18 में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के कामकाज में व्यय 71% है, जो कि वर्ष 2013-14 में लगभग मात्र 48% था.
  4. वित्त वर्ष 2017-18 में कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों पर लगभग 71% व्यय किया गया है, जिससे इस क्षेत्र पर दिये गए ज़ोर को देखा जा सकता है.
  5. मिशन जल संरक्षण के तहत पानी की कमी से जूझ रहे 2264 ब्लॉकों पर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में जल संचयन एवं जल संरक्षण समेत विशेष ध्यान दिया गया है.
  6. 96% मेहनताना मनरेगा मज़दूरों के बैंक/पोस्ट ऑफिस खातों में एनईएफएमएस के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तौर तरीक़ों से दिया जाता है.
  7. पिछले 11 वर्षों में 30 करोड़ लागों को रोज़गार प्राप्तम हुआ तथा 2000 करोड़ से अधिक कार्य दिवस सृजित हुए.
  8. अनुसूचित जाति के श्रमिक 20% तथा अनुसूचित जन जाति के 17% रहे.
  9. महिला श्रमिक 57% रहीं.
  10. 71% राशि मजदूरी भुगतान पर व्यय हुई.

मनरेगा की आलोचनाएं

  1. यह योजना भी गरीबी उन्मूलन की अन्य योजनाओं से अधिक प्रभावी नहीं है.
  2. सार्वजनिक कार्य योजनाओं का अंतिम उत्पाद (जैसे जल संरक्षण, भूमि विकास, वनीकरण, सिंचाई प्रणाली का प्रावधान, सड़क निर्माण, या बाढ़ नियंत्रण) असुरक्षित हैं जिन पर समाज के अमीर वर्ग कब्जा कर सकते हैं.
  3. स्थानीय सरकार के भ्रष्टाचार के कारण समाज के कुछ ख़ास वर्गों को बाहर रखा जाता है. ऐसा भी पाया गया कि स्थानीय सरकारों ने काम में लगे व्यक्तियों की वास्तविक संख्या से अधिक नौकरी कार्डों का दावा किया ताकि आवश्यकता से अधिक फंड को हासिल किया जा सके, जिसे फिर स्थानीय अधिकारियों व्दारा गबन कर लिया जाता है. जॉब कार्ड प्राप्त करने के लिए 50 रुपये तक की रिश्वत दी जाती है.
  4. इसमें काम के नाम पर गड्ढे खोदे और भरे जाते हैं, जिसकी कोई उपयोगिता नहीं है.
h2 style="text-align:center;text-decoration:underline;">दीनदयाल उपाध्याय अन्योदय योजना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)

ग्रामीण गरीब परिवारों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये उनकी गरीबी दूर करना है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने जून, 2011 में आजीविका-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की शुरूआत की थी. आजीविका-एनआरएलएम का मुख्य उद्देश्य गरीब ग्रामीणों को सक्षम और प्रभावशाली संस्थागत मंच प्रदान कर उनकी आजीविका में निरंतर वद्धि करना, वित्तीय सेवाओं तक उनकी बेहतर और सरल तरीके से पहुंच बनाना और उनकी पारिवारिक आय को बढ़ाना है. इसके लिए मंत्रालय को विश्व बैंक से आर्थिक सहायता मिलती है.

एनआरएलएम ने स्व-सहायता समूहों तथा संघीय संस्थानों के माध्यम से देश के 600 जिलों, 6000 प्रखंडों, 2.5 लाख ग्राम पंचायतों और छह लाख गांवों के 7 करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों (बीपीएल) को दायरे में लाने का और 8 से 10 साल की अवधि में उन्हें आजीविका के लिए आवश्यक साधन जुटाने में सहयोग देने का संकल्प किया है, जो एक कार्यक्रम के माध्यम से पूरा होगा.

एनआरएलएम समुदाय महासंघों कार्यान्वयन की जिम्मेदारी लेने तक दस साल की अवधि के लिए एक ब्लॉक में काम करने का इरादा रखता है.

NRLP मोटे तौर पर निम्नलिखित घटकों का समर्थन करेगा:

  1. संस्था और मानव क्षमता विकास,
  2. वित्तीय, आजीविका और सार्वजनिक सेवाओं के लिए उपयोग में सुधार के लिए ग्रामीण गरीबों के संस्थागत प्लेटफार्मों की स्थापना की दिशा में राज्य आजीविका का समर्थन,
  3. ग्रामीण गरीबों की मदद के नवाचार और उन्हें बड़े पैमाने पर फैलाने में सहायता,
  4. परियोजना प्रबंधन, निगरानी और लर्निंग सिस्टम्स का विकास.
  5. स्वय-सहायता समूहों को आजीविका के लिए नवीन उद्यम प्रारंभ करने में सहायता. इसके लिये उन्हें 7% ब्या ज पर ऋण उपलब्ध कराना.

महिला किसान सशक्तिकरण योजना यह एन आर एल एम के अंतर्गत योजना है. इसमें महिलाओं को कृषि आधिरित आजीविका के लिये सहायता दी जाती है.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन

  1. केन्द्र सरकार ने 16.09.2015 को योजना का अनुमोदन किया और 21.02.2016 से योजना प्रारंभ की गई.
  2. मिशन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आर्थिक क्रियाकलापों के अवसर उपलब्ध कराने, कौशल और उद्यमशीलता को विकसित करने तथा भौतिक अधोसंरचनाओं में वृध्दि करके रूर्बन क्लस्टर का सृजन किया जाना है.
  3. विभिन्न क्लस्टरों में 14 घटकों में कार्यकलाप एवं सुविधाओं का सृजन किया जाना है –
    1. कौशल प्रशिक्षण
    2. कृषि संस्करण, कृषि सेवा और भंडारण
    3. मोबाइल हैल्थ‍ यूनिट
    4. उच्चतर शिक्षा सुविधाओं का विकास
    5. स्वच्छता
    6. पाइप के ज़रिये पेयजल व्यवस्था
    7. ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
    8. ग्रामीण गलियां तथा नालियां
    9. स्ट्रीट लाइट
    10. गावों के बीच सड़क संपर्क
    11. सर्वाजनिक परिवहन
    12. एल.पी.जी. गैस केनक्शन
    13. डिजिटल साक्षरता
    14. सिटीज़न सर्विस सेंटर
  4. इन सभी के लिए 3 वर्षीय कार्य योजना बनाई गई है.
  5. राज्य में अभी तक कुल 3.56 लाख जनसंख्या के 18 क्लस्टर चयनित किए गए हैं. यह हैं – (1) कुण्डा (कबीरधाम), (2) लोहर्सी (धमतरी), (3) मड़पाल (बस्तर), (4) मुरमुंदा (बस्त‍र), (5) बड़े कापसी (कांकेर), (6) हरदी बाज़ार (कोरबा), (7) रघुनाथपुर (सरगुजा), (8) जेठा (जांजगीर-चांपा), (9) भंवरपुर (महासमुंद), (10) सोनहत (कोरिया), (11) जयरामनगर (बिलासपुर), (12) मिरीगुड़ा (रायगढ़), (13) बड़े कनेरा (कोण्डागांव), (14) पालीडीह (जशपुर), (15) मंदिर हसौद (रायपुर), (16) बसन्तपुर (बलरामपुर), (17) रामपुर (धमतरी), (18) बिरकोना (कवर्धा).
  6. भारत सरकार से अभी तक 10 क्लस्टरों की स्वीक्रति मिली है - (1) कुण्डा (कबीरधाम), (2) लोहर्सी (धमतरी), (3) मड़पाल (बस्तर), (4) मुरमुंदा (बस्त‍र), (5) बड़े कापसी (कांकेर), (6) हरदी बाज़ार (कोरबा), (7) रघुनाथपुर (सरगुजा), (8) जेठा (जांजगीर-चांपा), (9) भंवरपुर (महासमुंद), (10) सोनहत (कोरिया).
  7. कुल कार्य योजना 912 करोड़ रुपये की है.

प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में एस.ई.सी.सी. सर्वेक्षण के अनुसार सभी आवासहीनों को 2022 तक आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.
  2. योजना 1.04.2016 से प्रारंभ हुई.
  3. केन्द्रांश 60% तथा राज्यंश 40% है.
  4. 25 वर्गमीटर का मकान दिया जाता है.
  5. आवास या तो महिला के नाम से अथवा संयुक्त रूप से पति-पत्नि ‍ के नाम से दिया जाता है.
  6. आवास के साथ शौचालय निर्माण अनिवार्य है जिसके लिये प्रथक से 12000 रुपये का प्रावधान है.
  7. 90 मानव दिवस मनरेगा से अभिसरण व्दारा उपलब्ध कराने का प्रावधान है.
  8. प्रति आवास इकाई लागत सामान्य ज़ि‍ले के लिए 1,20,000 रुपये और आई.ए.पी. ज़ि‍ले के लिए 1,30,000 रुपये है.
  9. राज्य में 2019 तक 7.88 लाख आवास पूर्ण करने का लक्ष्‍य है. अभी तक 3.77 लाख आवास पूर्ण हो चुके है. इस योजना में छत्तीसगढ़ का देश में प्रथम स्थान है. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले ज़ि‍ले हैं – धमतरी, राजनांदगांव, बालोद, रायपुर और बलोदाबाज़ार.

स्वच्छ भारत मिशन

  1. 15 अगस्त 2014 के भाषण में स्‍वच्‍छता रखने की प्रधान मंत्री जी की अपील.
  2. 2 अक्टूबर 2014 से प्रारंभ.
  3. 2 अक्टूबर 2019 तक देश को खुले में शौचमुक्त करने का लक्ष्य तथा 11.11 करोड़ शौचालय निर्माण का लक्ष्य.
  4. पूर्व में 1986 से ग्रामीण स्वच्छता अभियान संचालित था. वर्ष 1999 में संपूर्ण स्‍वच्‍छता अभियान प्रारंभ किया गया था. 1.04.2012 से निर्मल भारत अभियान चलाया गया था.
  5. योजना में केन्द्रांश 60% तथा राज्यंश 40% है.
  6. योजना के घटक –
    1. व्यक्तिगत शौचालय पात्रता – गरीबी रेखा के नीचे के परिवार, अज/अजजा, लघु एवं सीमांत कृषक, भूमिहीन, दिव्यांग एवं महिला मुखिया वाले परिवार – 12000 रुपये प्रति हितग्राही प्रोत्साहन राशि (शौचालय हेतु 10000 एवं हाथ धोने के प्लेटफार्म तथा जल भंडारण हेतु 2000)
    2. सामुदायिक स्वच्छता परिसर ग्राम पंचायतों व्दारा परिसर के रख-रखाव का उत्दाायित्व स्वीकार करने पर 2 लाख रुपये का अनुदान.
    3. ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन 7 से 20 लाख का प्रावधान जनसंख्या के आधार पर.
    4. खुले में शौच मुक्त (ओ.डी.एफ.) विकास खंडों को सार्वजनिक कार्यक्रमों हेतु 2 नग चलित शौचालय देने का प्रावधान है.
  7. 31.05.2018 की स्थिति में छत्तीसगढ़ में प्रगति कुल 19,692 गावों में से 18,761 गांव ओ.डी.एफ. घोषित हो चुके हैं. केवल 931 गांव शेष हैं.

Rural Development in Chhattisgarh

Rural Development means social change along with economic development in rural areas. The objective of rural development is to improve the living conditions of people. Special emphasis is given on development of agriculture, industry, communication, education, health, transport and livelihoods. This understanding has also developed that fast development is possible only with participation of people at the ground level in Government efforts.

In Chhattisgarh the work of rural development is done by the Panchayat and rural development department.

Millennium Development Goals

8 Global goals were decided for the year 2015 in the Millennium Summit of United Nations in the year 2000. These are called Millennium Development Goals (MDGs). 189 member countries of the United Nations and 22 International Organizations pledged for the following goals -

  1. To eradicate extreme poverty and hunger
  2. To achieve universal primary education
  3. To promote gender equality and empower women
  4. To reduce child mortality
  5. To improve maternal health
  6. To combat HIV/AIDS, malaria, and other diseases
  7. To ensure environmental sustainability
  8. To develop a global partnership for development
    1. India has achieved the goals about HIV/AIDS, poverty, education and Child mortality. India has to still work for the remaining goals.

      Sustainable Development Goals

      Sustainable Development Goals (SDG), are the set of goals for future. They have been decided by the United Nations after the period of MDGs ended in 2015. These goals are for the period 2015 to 2030. There are 17 goals and 169 specific targets.

      193 countries agreed on 17 goals in August 2015 -

      1. End poverty in all its forms everywhere
      2. End hunger, achieve food security and improved nutrition, and promote sustainable agriculture
      3. Ensure healthy lives and promote well-being for all at all ages.
      4. Ensure inclusive and equitable quality education and promote lifelong learning opportunities for all.
      5. Achieve gender equality and empower all women and girls.
      6. Ensure availability and sustainable management of water and sanitation for all.
      7. Ensure access to affordable, reliable, sustainable and modern energy for all
      8. Promote sustained, inclusive and sustainable economic growth, full and productive employment and decent work for all.
      9. Build resilient infrastructure, promote inclusive and sustainable industrialization, and foster innovation
      10. Reduce income inequality within and among countries.
      11. Make cities and human settlements inclusive, safe, resilient, and sustainable.
      12. Ensure sustainable consumption and production patterns.
      13. Take urgent action to combat climate change and its impacts by regulating emissions and promoting developments in renewable energy.
      14. Conserve and sustainably use the oceans, seas and marine resources for sustainable development.
      15. Protect, restore and promote sustainable use of terrestrial ecosystems, sustainably manage forests, combat desertification, and halt and reverse land degradation and halt biodiversity loss.
      16. Promote peaceful and inclusive societies for sustainable development, provide access to justice for all and build effective, accountable and inclusive institutions at all levels.
      17. Strengthen the means of implementation and revitalize the global partnership for sustainable development

      Social Inclusion

      Equity, freedom, social justice and dignity of person are given special emphasis in Indian constitution. Our Constitution prohibits discrimination based on caste, creed, religion, income and sex. Provision for an inclusive society are contained in Article 14 – equality before law, Article 15 – prohibition of discrimination, Article 16 – equality of opportunity, Article 17 – ban on untouchability, Article 21 – protection to life and liberty, and Articles 23 and 24 – Economic security.

      In this context it is necessary that we look at a person as an independent personality instead of looking at him from in a social, caste, economic, physical and mental context. This will create the environment for inclusion of every person in the society. Concrete action for inclusion is necessary for participative democracy. The development of an inclusive society depends on taking advantage of the abilities of all persons in the society. Society cannot develop without the including everyone in the development process. Education is the most important tool of inclusion. Everyone gets equal opportunity in an inclusive society.

      Financial Inclusion

      Financial inclusion means making financial services available at affordable prices to backward and low income groups in the society. Some important financial services are loan, payments, sending money and insurance. People who do not get banking services are compelled to take them from non-formal banking institutions where the interest rates are high and the money available is less. Savings increase as a result of financial inclusion and new business opportunities become available. The biggest scheme of the Government for financial inclusion is Jan Dhan Scheme -

      Jan Dhan Scheme This is a scheme for access of banking services and ensuring that every family has at least one bank account. Prime Minister had announced the scheme on 15th August 2014.

      1. The scheme was formally launched on 28th August 2014.
      2. Till August 2017 approximately 29.48 crore bank accounts were opened in the scheme.
      3. Approximately 17.61 crore bank accounts were opened in rural and semi-urban areas and 11.87 crore bank accounts were opened in cities.
      4. Additional benefits of a bank account in Jan Dhan scheme are–
        1. A RUPAY debit card is issued which has an insurance cover of 1 lakh rupees.
        2. If the account is operated successfully for 6 moths the customer gets an overdraft facility for Rs 5,000.
        3. If the account remains open for a specified period the customer gets a life insurance of Rs 30,000.

      Convergence

      The objectives of many schemes of Government of India and State Governments are similar. If at the local level these schemes are implemented in a planned manner the synergies of the schemes can be utilized for greater benefit to the people. This is called convergence. For example skills may be developed under skill development schemes and then loan can be given under self-employment schemes for a business using these skills. Similarly in clusters where loans are given, infrastructure development for water, electricity and roads can be done under infrastructure development schemes. This is convergence.

      Rural Development Schemes of Government of India

      1. Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MANREGA) (details are given below)
      2. Deen Dayal Antyodaya Scheme for self-employment and skill development - National Rural Livelihoods Mission (NRLM) (details are given below)
      3. Deendayal Rural Skills Development Scheme -
        1. It is in force in all the districts of Chhattisgarh.
        2. BPL youth of 15 to 35 years of age are eligible under the scheme. The age limit for women, PTG, divyangs, rehabilitated bonded labor and third gender is 45 years.
        3. The target is training of 17,976 beneficiaries.
        4. So far 19,222 youth have been trained and 6,321 youth have been employed.
        5. Roshni scheme – It is being run in 8 Naxal affected districts (7 districts of Bastar Division and Balrampur). All provisions are similar to Deendayal Upadhyay Rural Skills Development Scheme.
        6. R-SETI – Residential training center for BLP youth with the help of lead bank - (Rural Self Employment Training Institute)
      4. Mission Antyodaya-
        1. Government of India has a target of elimination of poverty in 50,000 panchayats through integrated development.
        2. As per norms in the first phase 2287 panchayats have been selected in Chhattisgarh till 2020.
        3. Base line survey has been completed in the identified panchayats.
      5. Shyama Prasad Mukherjee Rurban Mission (Details are given below)
      6. Sansad Adarsh Gram Yojna (SAGY)-
        1. Started on 11th October 2014 on the birthday of Loknayak Jaiprakash Narain.
        2. Every MP has be identify 1 village panchayat by 2016 and 3 by 2017 and make them a model.
        3. The works to be undertaken include –
          1. Human Development – Education, Health, Nutrition and self-employment.
          2. Social Development and Social Security – Voluntary Labor, all types of pensions, PDS, insurance schemes, Jan Dhan scheme etc.
          3. Good Governance – More than100 services through common service centers.
          4. Economic Development – Agriculture, self-employment, skill development
          5. Infrastructure development – Electricity, drinking water, road, buildings
      7. Pradhan Mantri Awas Yojna Rural (Details are given below)
      8. Pradhan Mantri Gran Sadak Yojna (PMGSY)-
        1. Started from 12.12.2000
        2. Habitation of population 500 in general areas and 250 in IAP areas to be connected by all weather pukka roads.
        3. 7144 roads with total length of 32132 KMs made till 21.12.2017. 281 bridges constructed. Total expenditure Rs 9957 crores. 8828 habitations connected by all weather roads.
      9. Fourteenth Finance Commission- Money goes directly into the bank account of Panchayats. Each Panchayat get Rs 10 lakh. The money can be used for drinking water, sanitation, solid waste management and maintenance of assets.
      10. Rashtriya Gram Swaraj Abhiyan - It is a 100% Centre Sector Scheme. 42 crore rupees were received during 2016-17. The money is to be used in capacity development of panchayat representatives, government officers, NGOs etc.
      11. Insurance Schemes -
        1. Aam Admi Beema Yojna - This is for rural landless labor – Total premium is Rs 200 (Rs 100 given by central Government and Rs 100 by the State Government); Eligibility is inclusion in the SECC list, age between 18 and 59 years; Benefit – On death Rs 75,000 and on loss of limb Rs 37,500.
        2. Atal Khetihar Majdoor Beema Yojna -This is for small and marginal farmers. Rest is similar to the Aam Admi scheme.
        3. Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Beema Yojna- Started on 1.05.2015; Age 18 to 50 years; Premium Rs 230 per annum; Coverage of Rs 2 lakh on death. This is for BPL and low income groups.
        4. Pradhan Mantri Suraksha Beema Yojna -18 to 70 years; Premium Rs 12 per annum. Rs 2 lakh coverage in the event of accident.
        5. Atal Pension Scheme- Rs 1000 to 5000 pension on completion of 60 years of age depending on the contribution of the beneficiary. Eligibility 18 to 40 years. For the beneficiaries of unorganized sector. The contribution of beneficiary in the premium is Rs 500 and of the Central Government Rs 500 per month.
      12. Swachha Bharat Mission (Details are given below)

      Scheme of Government of Chhattisgarh

      1. Chhattisgarh State Livelihoods Mission ‘Bihan’ - Rural livelihoods programme named Bihan was started in Chhattisgarh on 1st April 2013 after stopping Swarna Jayanti Rural Self-employment scheme. This programme assisted by the World Bank is being implemented in 85 blocks in which 11.66 lakh poor families are benefitted. 1,13,600 self help groups have been made. Revolving fund for intra group credit and community investment for group activities is made available through credit linkage from banks. So far 1012 rupees have been given.
      2. Chief Minister Gram Sadak Vikas Yojna-
        1. This is for connecting habitations of general areas with a population of 250 or more with all weather roads.
        2. Started from 23rd April 2011. So far 1385 roads of 4380 Kilometer length with a cost of Rs 2170 crores have been made.
      3. Mukhya Mantri Gram Gaurav Path Scheme -
        1. This is for internal roads of villages (CC road with drain)
        2. Started from April 2012
        3. So far 6211 roads with a total length of 1870 KMs. with a cost of Rs1124 crores have been made.
      4. Vidhayak Adarsh Gram Yojna - This is similar to Sansad Adarsh Gram Yojna. 180 Village Panchayats have been identified in 2 years.
      5. Thakur Pyarelal State Panchayat and Rural Development Institute - Started in October 2001. It is an institute or capacity building of newly elected representatives of local self Government. Training is given for better management and good governance with sustainable development and environmental protection.
      6. Shradhanjali - Started on 1st July 2016. Rs 2000 assistance is given on the death of head of family or earning member of families in the SECC list for last rites of the diseased. The responsibility of giving the money on time is on the Sarpanch and gram sachiv.
      7. Food grains for the needy - One quintal food grains are kept in every village panchayat out of which 5 kilograms is given to the needy whenever required.
      8. Mukhamantri Samagra Gramin Vikas Yojna- It was started in 2014. This scheme is for creating infrastructure according to local needs. Works to the extent of Rs 20 lakh can be sanctioned for each panchayat in a year. So far 33577 works worth 1630 crores have been completed.
      9. Atal Samrasta Yojna- Community halls are constructed at the cost of Rs 20 lakh in villages with a population of 3000 and above for community functions to improve social integration.
      10. Mini stadium construction - Mini stadia are constructed with a cost of 50 lakh in villages with population of 3000 and above where 3-5 acres of government land is available for sports facilities for youth.
      11. Swami Vivekanand Yuva Protsahan Yojna - This is a scheme to develop social consciousness in youth in the age group of 15 to 35 years.
      12. Swami Atmanand Vachnalaya - These are reading rooms at the panchayat level where newspapers and books on current topics are kept.
      13. Hamar Chhattisgarh Yojna - This was started on 1st July 2016 and was to end on 20th June 2018. It has now been extended to 30th September 2018. 2 lakh elected representatives of 10976 panchayats and 111 nagar panchayats in 27 districts were to be brought on a tour of Raipur. 1.50 lakh representatives have already visited Raipur under the scheme. In Raipur they are taken to see the Vidhan Sabha, Mantralaya, Indira Gandhi Agriculture University, Science Center, Botanical garden, Purkhoti Muktangan, Museum, Airport, cricket stadium etc.

      Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MANREGA)

      Objective The objective of the Act is to enhance livelihood security in rural areas by providing at least 100 days of guaranteed wage employment in a financial year to every household whose adult members volunteer to do unskilled manual work.

      Targets

      1. Social security for the most deprived persons of India by providing employment.
      2. - Creation of permanent assets, better water security, soil conservation, improved productivity of land and livelihoods security for the poor.
      3. Drought proofing and flood control.
      4. Ensuring the rights of the deprived classes specially women, SC, and ST through legal process and a rights based approach.
      5. Strengthening decentralised participative planning by coordinating poverty alleviation and livelihood initiatives.
      6. Strengthening Panchayati Raj and democracy at grassroots.
      7. Bringing transparency and accountability in government.

      Coverage Entire country is covered. Only those districts are left out which are fully urban.

      Paradigm Shift

      1. MANREGA is the first large scale programme in human history which is different from any other employment programme due to its outreach, structure, objectives, and its bottom up, people centric and rights based design.
      2. Legal guarantee for wage employment has been given.
      3. It is a demand based programme.
      4. If employment is not given on demand, or if wage payment is delayed, there is a legal provision of giving allowance and compensation.
      5. Self targeting approach takes care of targeting problems and extremely poor and marginalised people get employment under the scheme.
      6. It encourages States to give employment because 100% unskilled labour cost and 75% material cost is borne by the Centre.
      7. as opposed to previous allotment based programmes MNAREGA is demand based and transfer or resources from the centre to States happens on the basis of demand. This helps in improving employment creation by the States.
      8. If employment is not given on time there is disincentive for States because the States have to bear the cost of unemployment allowance.
      9. At least 50% works are to be done by the village panchayat. This is an unprecedented devolution of financial resources to the panchayats.
      10. The decisions about the works to be done, the priority to be given to them, the place of works etc. are taken in open meetings of gram sabha.
      11. Highest authority cannot reject these decisions of the Panchayats but can give directions for proper implementation of the provisions of the act.
      12. This bottom up approach also means that the success of MANREGA depends to a large extent on the people demanding work, gram sabhas and panchayats.
      13. MANREGA frees us from earlier relief programmes by creating livelihoods and natural resources management.
      14. Social audit is a very important thing about MANREGA. It creates an unprecedented accountability of all stakeholders.
      15. A report on results of MAREGA prepared by the Central Employment Guarantee Council (CEGC) is presented to the Parliament every year by the central government. Similarly reports prepared by the State employment Guarantee Councils are presented the Vidhan Sabhas by the State Governments.

      Main Stakeholders

      1. People demanding employment
      2. Gram Sabha – Gram sabha is the main forum for hearing the people demanding employment and fulfilling their demands. It is also the forum for social audit.
      3. Panchayati Raj institutions specially village Panchayat.
      4. Programme Officer (PO) at Block level
      5. District Programme Coordinator (DPC)
      6. State Government – According to the Section 12 of MANREGA each State Government has to establish a State Employment Guarantee Council (SEGC).
      7. Rural Development Ministry – A Central Employment Guarantee Council with the Central Rural Development Minister as its president is established at the central level.
      8. Civil Society – Civil society organizations (CSO) play an important role in creation of awareness, planning, implementation, social audit etc. at the field level specially panchayat level. The role and framework for CSOs is discussed in detail chapter 9 of the Act.
      9. Other Stakeholder such as line departments, convergence departments, self help groups etc.

      Unemployment Allowance If the applicant is not given employment within 15 days of demand he becomes eligible for unemployment allowance. Unemployment allowance is to be paid according to section 7 of this Act. For the first 30 days unemployment allowance should be not less than one fourth of the wage and for the remaining part of the financial year it should not be less than half of the wage rate.

      Works to be undertaken in the Scheme

      1. Management of Natural Resources
      2. - Beneficiary oriented works such as land productivity improvement, agriculture, horticulture, sericulture, plantation etc. for deprived classes (SC, ST, BPL families, Disabled).
      3. Creation of infrastructure for NRLM and self help groups.
      4. Creation and maintenance of rural infrastructure.

      Achievements

      1. The allotment of Rs 48,000 crore for financial year 2017-18 is the highest allotment for MANREGA so far.
      2. In the year 2017-18 so far 4.35 crore families have been given employment for 156 lakh man days. 54% employment was for women which is much higher as compared to the legal requirement of 33%.
      3. In the year 2017-18 so far 60% expenditure has been on conservation of Natural Resources (NRM), 71% expenditure was on agriculture related activities which was only 48% in 2013-14.
      4. Expenditure on agriculture related activities in the year 2017-18 has been 71%.
      5. Special attention has been given on water conservation in 2264 blocks affected by scarcity of water.
      6. 96% wages have been deposited in bank accounts and post offices directly through NIFMSS electronically.
      7. In the last 11 years 30 people have got employment and 2000 crore man days have been created.
      8. The workers of SC are 20% and of ST 17%.
      9. Women workers were 57%.
      10. 71% money was spent on wages.

      Criticism of MANREGA

      1. This scheme is not as effective as other schemes of poverty alleviation.
      2. The final products of public works such as water conservation, land development, aforestation, irrigation systems, roads, flood control etc.), are not safe and the rich class of the society may control it.
      3. Due to corruption in local government certain classes of people may be kept out of the scheme. It has also been seen that fake job cards in much higher numbers than actual workers are made to claim funds which is than misappropriated by the local authorities. Bribes are demanded for making job cards.
      4. Only digging and filling of land is done in the scheme which has no long term advantage.

      Deen Dayal Upadhyay Antyodaya Yojna State Rural Livelihoods Mission (DAY-NRLM)

      The objective of this scheme is to bring rural poor in the mainstream and alleviate poverty. The scheme was launched by Central Government in June 2011as National Rural Livelihoods Mission (NRLM). Its objective is to provide a institutional mechanism to the rural poor and improve their livelihood opportunities continuously, improve access to financial services and increase family income. The programme has received World Bank assistance.

      NRLM has shall bring into its fold 7 crore BPL families in 600 districts, 6000 blocks, 2.5 lakh panchayats and six lakh villages with the help of federal institutions and self help groups and assist them in getting necessary resources for livelihoods over a period of 8 to 10 years.

      NRLM intends to work in blocks for 10 years till the community groups are in a position to take over the responsibility.

      NRLP will support the following:

      1. Institution and capacity building,
      2. Support State level Ajeevika for better utilization of financial services, and community services and improvement in institutional platforms for the poor,
      3. Innovations for helping the rural poor and up-scaling them,
      4. Development of Project management, monitoring and learning systems,
      5. Assistance to self help groups for starting new enterprise at 7% interest rate.

      Mahila Kisan Sashaktikaran Yojna This is a scheme under NRLM. In this scheme women are given assistance for agriculture based livelihoods.

      Shyama Prasad Mukherjee Rurban Mission

      1. Central Government approved the scheme on 16.09.2015 and the scheme was started on 21.02.2016.
      2. The objectives of the Mission are to provide opportunities for economic activities at the local level by developing skills and entrepreneurship and increasing infrastructure in the Rurban cluster.
      3. Facilities are created in 14 components in the clusters –
        1. Skill training
        2. Agriculture services and warehousing
        3. Mobile health unit
        4. Development of higher education facilities
        5. Sanitation
        6. Piped drinking water supply
        7. Solid and liquid waste management
        8. Rural lanes and drains
        9. Street light
        10. Connecting roads between villages
        11. Public transport
        12. LPG Gas connection
        13. Digital literacy
        14. Citizen service centres
      4. 3 years action plan is made for this.
      5. In Chhattisgarh state 18 clusters with a population of 3.56 lakh have been identified. These are – (1) Kunda (Kabirdham), (2) Loharsi (Dhamtari), (3) Madpal (Bastar), (4) Murmunda (Bastar), (5) Bade Kapsi (Kanker), (6) Hardi Bazar (Korba), (7) Raghunathpur (Surguja), (8) Jetha (Janjgir-Champa), (9) Bhanwarpur (Mahasamund), (10) Sonhat (Koria), (11) Jairamnagar (Bilaspur), (12) Miriguda (Raigarh), (13) Bade Kanera (Kondagaon), (14) Palidih (Jashpur), (15) Mandir Hasaud (Raipur), (16) Basantpur (Balrampur), (17) Rampur (Dhamtari), (18) Birkona (Kawardha).
      6. So far sanction of 10 clusters has been received from Government of India - (1) Kunda (Kabirdham), (2) Loharsi (Dhamtari), (3) Madpal (Bastar), (4) Murmunda (Bastar), (5) Bade Kapsi (Kanker), (6) Hardi Bazar (Korba), (7) Raghunathpur (Surguja), (8) Jetha (Janjgir-Champa), (9) Bhanwarpur (Mahasamund), (10) Sonhat (Koria)
      7. Total action plan is for Rs 912 cores.

      Pradhan Mantri Awas Yojna Rural

      1. The objective of the scheme is to make available a hose to all the homeless as per SECC survey by 2022.
      2. The scheme was started on1.04.2016.
      3. The share of the central government is 60% and of the state is 40%.
      4. A house of 25 sq. meters is given.
      5. House is in the name of the woman or jointly in the name of husband and wife.
      6. Construction of toilet with the house is compulsory for which there is a separate provision of 12000 rupees.
      7. 90 man days are made available through convergence with MANREGA.
      8. The unit cost is Rs 1,20,000 in general areas and Rs 1,30,000 in IAP areas.
      9. The target in the Chhattisgarh State is to complete 7.88 lakh houses by 2019. So far 3.77 lakh houses have been completed. Chhattisgarh is at the first position in the country in the implementation of the scheme. Dhamtari, Rajnandgaon, Balod, Raipur and Baloda Bazar districts are the best performing districts.

      Swachh Bharat Mission

      1. Prime Minister made an appeal on 15th August 2014.
      2. The scheme was launched on 2nd October 2014.
      3. The target is to make the country open defecation free (ODF) by 2nd October 2019. For this 11.11 crore toilets have to be constructed.
      4. Previously from 1986 Rural Sanitation Campaign was being run. In the year 1999 total sanitation campaign was started. Nirmal Bharat Campaign was started on 1.04.2012.
      5. The Central share in the scheme is 60% and state share is 40%.
      6. Components of the scheme –
        1. Personal toilets – Eligibility – Families Below Poverty Line, SC/ST, small and marginal farmers, landless, disabled, women headed households – Rs 12000 per beneficiary is given (Rs 10000 for toilet and Rs 2000 for making water storage and hand washing platform)
        2. Community sanitation centres – These are made if the village Panchayat accepts the responsibility of maintaining them. A grant of Rs 2 lakh per Panchayat is given.
        3. Solid and liquid waste management – Rs 7 to 20 lakh is given based on population.
        4. 2 mobile toilets are given to blocks which have been declared ODF for use in public functions.
      7. Progress in Chhattisgarh as on 31.05.2018 – A total of 18,761 villages out of 19,692 have been declared ODF. Only 931 villages are left.

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