कोरानावीर ऋषि - हमारे - 10

कोरोनावीर शिक्षकों से मिलने की यात्राओं में हम लगभग पूरे प्रदेश का दौरा ब्‍लॉगों की इन कड़ियों के माध्‍यम से कर चुके है. आज बस्‍तर संभाग के सुदूर दक्षिणी हिस्‍सों में वनांचल में काम कर रहे शिक्षकों से मिलते हैं.

24 सितंबर बीजापुर

भैरमगढ़ बीजापुर

गणेश जी वार्ड पारा के गली मोहल्ला क्लास में माध्यमिक स्तर पर कुल 15 बच्चे तथा हाईस्कूल स्तर पर 11 बच्चे अध्ययनरत थे इन बच्चों को कुल 4 शिक्षकों के द्वारा गली मोहल्ला क्लास लिया जा रहा था जिसमें श्री रघुराम सोनवानी कक्षा 9वी तथा श्रीमती आशा कुजुर कक्षा छठवीं एवं श्रीमती खलखो कक्षा सातवीं तथा श्रीमती सुजाता जैन के द्वारा कक्षा आठवीं के छात्र छात्राओं को अध्यापन कार्य कराया जा रहा था. बच्‍चे अंग्रेज़ी की किताब को धाराप्रवाह पढ़ रहे थे. देखकर बहुत अच्‍छा लगा.

शा0उ0मा0वि0 धनोरा जिला बीजापुर शिक्षक नरेश चौहान, श्री रामलाल गांधरला ,उषा मंजू खाखा ,ऋषि कावरे और प्राचार्य एस एस कोड़ोपी बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेने में लगे हैं. वे मोबाइल से बच्‍चों की कक्षाएं ले रहे हैं.

सामाजिक भवन संजयपारा भैरमगढ़ में 60 बच्चों को 3 शिक्षकों प्रभात चौहान, इंदु देवांगन , और कमलेश साहू के द्वारा कोराना संकट काल में शिक्षण दिया जा रहा है. अवधारणाओं को समझाने के लिए खेल, वीडियो, ऑडियो आदि का उपयोग किया का रहा है. साथ ही चित्रकला, रंगोली, ड्रॉइंग आदि भी सिखाने का प्रयास किया जा रहा है.

25 सितंबर सुकमा

सुकमा के शिक्षकों का काम इतना अच्‍छा है क‍ि मुझे लगता है कि यह काम शब्‍दों का मोहताज नहीं है. मैं आज उनके काम के कुछ वीड‍ियो आपके लिये लाया हूं.

बोयारास कोर्रा में किशन कुमार नाग

बोयारास कोर्रा में कुंती मंडावी

बोयारास कोर्रा में में लता मरकाम

बोयारास कोर्रा में मकराध्‍वज दुग्‍गे

डुरमापारा में अश्‍वनी यादव

डुमरापारा में सीमा शर्मा

गोलागुड़ा कुदमेलपारा में जयमाला राम

सीधीपारा में परिणीता कश्‍यप

25 सितंबर दंतेवाड़ा

दंतेवाड़ा में मुझे ज्ञानगंगा केन्‍द्र हितावर दिखाया गया. वहां का वीडियो भी देखिये.

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Comments :

Sushil Rathod On: 15/10/2020

आदरणीय प्रमुख सचिव महोदय का यह ब्लॉग उनके द्वारा कोरोना संक्रमण काल में किए जा रहे अवलोकन दौरों के क्रम में दक्षिणी बस्तर के सुदूर वनांचल जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा में पढ़ई तूहंर दुआर योजना अन्तर्गत हो रहे प्रयासों का वृत्तांत देता है, उन सभी शिक्षकों को हार्दिक बधाई, जिनका अथवा जिनके कार्यों का उल्लेख यहां हुआ है। यह समर्थ मन ही है जो प्रतिकूलताओं में भी निर्माण की शक्ति देता है। स्वप्रेरणा से किए गए कार्य सदैव प्रशंसा के हकदार होते हैं क्योंकि वे सौंपे गए कार्य तक स्वयं को सीमित ना कर, एक क़दम आगे रखने का माद्दा रखते हैं और यही उन्हें अलग पहचान भी देता है। मेरी अपनी समझ के अनुसार आदरणीय सर के इन दौरों से कुछ प्रतिमान स्थापित हुए हैं : 1. शिक्षा में अकस्मात अथवा भौंचक निरीक्षण की नहीं अपितु संवेदनशील अवलोकन की ज़रूरत है (कमियां अपने आप दिखाई देती है, परन्तु अच्छाईयों को देखने के लिए प्रयास करना होता है। कमियां देखने और गिनाने से दूरियां बढ़ती है, जबकि अच्छाइयां देखने का हर प्रयत्न व्यक्ति को व्यक्ति से क़रीब लाता है)। 2. अवलोकन जिसका मुख्य Focus यह हो कि विद्यार्थी कितना सीख पा रहें है, शिक्षक किस तरह सीखने की परिस्थितियों का निर्माण करते हैं , (ना कि केवल कितने अनुपस्थित है अथवा क्या क्या कमियां है और डांट फटकार।) 3. शिक्षक का आंकलन विद्यार्थी दक्षता पर आधारित हो (विद्यार्थी ने जो भी सीखा है, उसे विद्यार्थी द्वारा करके दिखा पाना) 4. शिक्षक के अच्छे कार्यों पर चर्चा हो ना कि शिक्षक को स्वयं अपने कार्य गिनवाना पड़े। यदि ऐसा हो सका तो इससे उस कार्य संस्कृति का विकास होगा जो हर शिक्षक को उपलब्धि के लिए कार्य किए जाने की ओर प्रवृत्त करेगी, जिसके केंद्र में विद्यार्थी है और जिनमें हम सारे परिवर्तन देखना चाहते हैं। आदरणीय सर के वृहद प्रशासनिक अनुभव और शैक्षिक चिंतन से आने वाले समय में हमारा छत्तीसगढ़, शालेय - शिक्षा में बड़े सकारात्मक परिवर्तन का साक्षी बनेगा, इसी विश्वास के साथ : सुशील राठोड़

Avlok Shukla On: 13/10/2020

स्वेच्छा कार्य से इतना बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर पाना असंभव सा ही प्रतीत होता है परन्तु सभी के सहयोग से यह संभव हो पाया है

Avlok Shukla On: 13/10/2020

सराहनीय प्रयास। सभी के अथक परिश्रम व आपके उचित मार्गदर्शन से यह कमाल हो सका है। स्वेच्छा कार्य से इतना बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर पाना

Anima Upadhyay On: 13/10/2020

आपका प्रत्येक क्षेत्र में दौरा करना व शिक्षकों और छात्रों को प्रोत्साहित करना भी अत्यंत सराहनीय है।काश आपसे प्रोत्साहन लेकर अन्य राज्य भी ऐसा ही मॉडल अपनाये व शिक्षा का स्तर बेहतर बनाये।

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