नया साल मुबारक

इक बार फिर से नया साल आ पहुंचा. सोचा इस बार आप सबको कुछ अलग ढ़ग से नये साल की मुबारकबाद दूं. हिन्‍दी और उर्दू के महान कवियों और शायरों ने नये साल पर बुहत कुछ कहा है. सोचा कि उनकी लेखनी की कुछ बातें इस पहली जनवरी को आन तक पहुंचा सकूं. सारी बातों को एक ब्‍लाग में समो लेना तो संभव नहीं है, फिर भी इन महान कवियों और शायरों में ज़ि‍न्दगी के फलसफे को लेकर नये साल पर जो कुछ कहा है उसे चंद लाइनों और यू-ट्यूब पर उपलब्‍ध कुछ वीडियोज़ के ज़रिये आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा हूं. उम्‍मीद है आपको पसंद ज़रूर आयेगा.

शुरुआत करते हैं 1967 में रचित बाबा नागार्जुन की इस कविता से जिसमें उन्‍होने ने बड़ा ही तीखा तंज़ किया है -

फलाँ-फलाँ इलाके में पड़ा है अकाल
खुसुर-पुसुर करते हैं, ख़ुश हैं बनिया-बकाल
छ्लकती ही रहेगी हमदर्दी साँझ-सकाल
--अनाज रहेगा खत्तियों में बन्द !

हड्डियों के ढेर पर है सफ़ेद ऊन की शाल...
अब के भी बैलों की ही गलेगी दाल !
पाटिल-रेड्डी-घोष बजाएँगे गाल...
--थामेंगे डालरी कमंद !

बत्तख हों, बगले हों, मेंढक हों, मराल
पूछिए चलकर वोटरों से मिजाज का हाल
मिला टिकट ? आपको मुबारक हो नया साल
--अब तो बाँटिए मित्रों में कलाकंद !

हर‍िवंशराय बच्‍चन ने अपनी इस प्‍यारी कविता में सभी को नये साल की शुभकामनाएं अहुत खूबसूरती से दी हैं -

गीत नवल,
प्रीत नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल!

इसे यू-ट्यूब पर सुनिए -

देखिये ग़ालिब ने नये साल पर क्‍या उम्‍मीद जताई है -

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़
इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

और देखिये इसका कितना खूबसूरत जवाब क़तील श़ि‍फाई ने दिया है -

जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
उस को दफ़नाओ मिरे हाथ की रेखाओं में

और अहमद फ़राज़ में भी इसका जवाब खूबसूरती से दिया है -

न शबो रोज़ ही बदले हैं, न हाल अच्‍छा है
किस बरहमन के कहा है कि साल अच्‍छा है

सर्वेश्‍वर दयाल सक्‍सेना ने नये साल की शुभकामनाएं किस प्रकार दी है -

नए साल की शुभकामनाएँ!
खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को
नए साल की शुभकामनाएं!

जाँते के गीतों को बैलों की चाल को
करघे को कोल्हू को मछुओं के जाल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस पकती रोटी को बच्चों के शोर को
चौंके की गुनगुन को चूल्हे की भोर को
नए साल की शुभकामनाएँ!

वीराने जंगल को तारों को रात को
ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से ख़याल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्ही याद को हर छोटी भूल को
नए साल की शुभकामनाएँ!

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नए साल की शुभकामनाएँ!

यह भी यू-ट्यूब पर सुनिए -

दूसरी ओर रामधारी सिंह दिनकर तो कहते हें कि यह नव वर्ष हमारा है ही नहीं इसलिए यह नववर्ष हमें स्‍वीकार नहीं -

ज़रा देखिये अमृता प्रीतम को नया साल कैसा लगता है -

जैसे सोच की कंघी में से
एक दंदा टूट गया
जैसे समझ के कुर्ते का
एक चीथड़ा उड़ गया
जैसे आस्था की आँखों में
एक तिनका चुभ गया
नींद ने जैसे अपने हाथों में
सपने का जलता कोयला पकड़ लिया
नया साल कुझ ऐसे आया...

जैसे दिल के फ़िक़रे से
एक अक्षर बुझ गया
जैसे विश्वास के काग़ज़ पर
सियाही गिर गयी
जैसे समय के होंटो से
एक गहरी साँस निकल गयी
और आदमज़ात की आँखों में
जैसे एक आँसू भर आया
नया साल कुछ ऐसे आया...

जैसे इश्क़ की ज़बान पर
एक छाला उठ आया
सभ्यता की बाँहों में से
एक चूड़ी टूट गयी
इतिहास की अंगूठी में से
एक नीलम गिर गया
और जैसे धरती ने आसमान का
एक बड़ा उदास-सा ख़त पढ़ा
नया साल कुछ ऐसे आया...

अब इसे यू-ट्यूब पर सुनिए -

और अहमद फराज़ अपने चाहने वाले से दूर नये साल का इस्‍तेकबाल कुछ इस तरह करते हैं -

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
जिसके होते हुए होते थे ज़माने मेरे

और आइए देखते हैं कि आधुनिक मंच पर अशोक चक्रधर किस प्रकार सभी को नये साल की मुबारकबाद दे रहे हैं -

और इमरजेंसी का एक वर्ष बीतने पर भारत के लोकप्रिय प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई के हृदय ने क्‍या कहा इसे उन्‍ही की आवाज़ में और उसके बाद जगजीत सिंह की आवाज़ में सुनिए -

आखिर में सुनिये फैज़ की यह प्‍यारी नज्‍़म जिसमें वह नये साल से पूछ रहे हैं कि उसमें नयापन क्‍या है -

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Comments :

Raghuvansh Mishra On: 31/12/2018

Very nice and useful collection.

Aditi D. Sharma On: 31/12/2018

बहुत ही बेहतरीन शब्दाें का सँकलन, मेलजाेल व तालमेल...नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये..🙂🙏

Shirish Tiwari On: 31/12/2018

Behatrin sankalan sir,,,nav varsh ki anant shubhkamnaye

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