छत्‍तीसगढ़ के खेल

एक बहुत ही अच्‍छे नवाचारी श‍िक्षक हैं - इंद्रभान सिहं कंवर. वे बाल पत्र‍िका क‍िलोल के लिये हमेशा बहुत अच्‍छी रचनाएं भेजते हैं. साथ ही उन्‍होने बच्‍चों को आनंददायी शिक्षा देने के ल‍िये बहुत सी नवाचारी गतिव‍िध‍ियां भी बनाई हैं. आज उन्‍होने मुझे वाट्सएप पर छत्‍तीसगढ़ के गांवों में बच्‍चों व्दारा खेले जाने वाले खेलों पर बेहद प्रभावशाली वीड‍ियो भेजे हैं. इन्‍हें देखकर मुझे लगा कि यह खेल न केवल हमारी पुरानी धरोहर हैं, बल्कि आज भी हमारे बच्‍चों को खुशियां देने का प्रभावशाली संसाधन हो सकते हैं. इसीलिये मैंने सोचा क‍ि आज का ब्‍लाग इंद्रभान जी का ही हो. आगे का ब्‍लाग उन्‍हीं के शब्‍दों में है. ब्‍लाग में इंद्रभान जी व्दारा भेजे गये वीड‍ियो भी मैने जोड़ द‍िये हैं ज‍िससे वे लोग जो शहरों की आपाधापी में हमारे इन खेलों को भूल गये हैं - वे भी इनका आनंद ले सकें ओर अपने अंदर के बालक को जीवित कर सकें.

इंद्रभान सिहं कंवर का आलेख

आज मैं कक्षा तीसरी में पाठ-8 चलव खेल खेलबो छत्तीसगढ़ी पाठ पढ़ा रहा था. पाठ में हमारे बचपन में खेले गए कुछ खेल के बारे में छत्तीसगढ़ी भाषा में दिया हुआ है. उसी तरह के कुछ और खेलों के बारे में मैंने अपने प्यारे बच्चों से पूछा, जिस पर उन्होंने बहुत सारे खेलों के बारे में मुझे बताया. यह खेल देखकर मुझे अपने बचपन की याद आ गई.

वास्तव में वर्तमान समय में बच्चों का ध्यान इन सब खेलो से दूर होता जा रहा है. उनका ध्यान अन्य चीजों पर ज्यादा रहता है, जिसका असर बच्चों के स्वास्थ्य, शरीर एवं दिमाग पर पड़ता है. तो अपने शरीर एवं दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए बच्चों को इन सब खेलों की ओर ध्यान देना चाहिए और अपना बचपन खुल कर जीना चाहिए

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए मैं आप लोगों से इन बच्चों के द्वारा खेले गए खेल को शेयर करने से रोक नहीं पाया जिन्होंने हमारी बचपन की यादें ताजा कर दीं.

4

Add Your Comments Here

Comments :

Madan sahu On: 12/09/2019

कलेक्शन बहुत अच्छा किए हो सर परंतु इसमें थोड़ा सा नवाचार करते हुए इसको नया नया रूप देना था

Atul Shukla On: 12/09/2019

आज फिर बचपन के दिन याद आ गया... यह सब खेलो से बच्चे खुश भी होते है और स्वास्थ्य भी रहते है शरीर और मस्तिष्क भी active रहता है धीरे धीरे यह सब खेल खेलना बंद होते जा रहे बच्चे भुलते जा रहे है अब सभी मोबाइल मे ही busy रहने लगे है इंद्र भान सिंह कंवर सर को बहुत बहुत बधाई जो बच्चो के लिए हमेशा कुछ नया करते रहते है ।

रामेश्वर वर्मा (शिक्षक) On: 12/09/2019

प्राचीन समय से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित बचपन में खेले जाने वाले इस तरह के खेल मानव चेतना अर्थात गहरे मनोविज्ञान (योग) पर आधारित शारीरिक तथा मानसिक विकास की गहरी विधियां हैं, जो बचपन में विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक है। साथ ही यह बच्चों को अपनी प्राचीन परंपरा से भी परिचित कराती है। आधुनिकता की दौड़ में हम सब इन प्राकृतिक चीजों को भूलते और कृत्रिम चीजों को अपनाते जा रहे हैं ,जो कि बच्चों के वास्तविक विकास में बाधक हैं, विद्यार्थियों को शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ प्रसन्न शांतचित्त एकाग्र बनाए रखने के लिए इसे स्कूली शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाए जाने की जरूरत है, ये विधियां सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं है बल्कि यह योग की भाषा में कहें तो- बच्चों के लिए ध्यान की विधियां है जो शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ चेतना के विकास की विधियां हैं जो विद्यार्थियों के स्कूली शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी तथा लाभदायक है। इस पर मिलकर और काफी रिसर्च किए जाने और इसे शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाए जाने की दिशा काफी प्रयास की आवश्यकता है। इस कार्य में शिक्षकों की भी भूमिका काफी कीमती है

Anima Upadhyay On: 11/09/2019

It reminds me also of many outdoor games that we used to play बचपन yaad आ गया जब हमने भी ऐसेबहुत से मजेदार खेल खेले हैं

Visitor No. : 1271263
Site Developed and Hosted by Alok Shukla