वायु

वायु को हम देख नहीं सकते परन्‍तु अनुभव कर सकते हैं. यह हमारे चारों ओर है. वायु हमारे सांस लेने के लिये भी आवश्‍यक है. वायु के बिना हम जीवित नहीं रह सकते.

वायुमंडल - हमारी पृथ्‍वी के चारों ओर वायु का एक आवरण है. इसे ही वायुमंडल कहते हें. वायुमंडल में अनेक गैस होतीं हैं. इसके अतिरिक्‍त वायुमंडल में जल वाष्‍प, धूल के कण, आदि भी होते हैं. वायुमंडल में मौजूद गैसों में हमारे लिये सबसे महत्‍वपूर्ण ऑक्‍सीजन गैस है जो वायुमंडल का 21 प्रतिशत है. सबसे अधिक मात्रा में नाईट्रोजन गैस होती है. यह वायुमंडल का 78 प्रतिशत है.

आइये वायु के बारे में एक वीडियो भी देखें -

ऑक्‍सीजन - ऑक्‍सीजन वायुमंडल में 21 प्रतिशत होती है. इसे बनाने का तरीका नीचे के वीडियो में दिखाया गया है. इसी में आक्‍सीजन का यह गुण भी दिखाया गया है कि ऑक्‍सीजन स्‍वयं नहीं जलती है परन्‍तु जलने में सहायता करती है ऑक्‍सीजन का उपयोग श्‍वसन में होता है. वेल्डिंग में भी ऑक्‍सीजन का उपयोग किया जाता है.

ऑक्‍सीजन की महत्‍वपूर्ण बातों पर वीडियो देखिए -

नाईट्रोजन - नाईट्राजन वायुमंडल में 78 प्रतिशत होती है. इसके गुण तथा उपयोग के बारे में एक वीडियो देखिये -

वायु प्रदूषण - मानव के क्रियाकलापों से वायु में बहुत सारी अवांछित तथा हानिकारक वस्‍तुएं मिल जाती हैं. इसे ही वायु प्रदूषण कहते हैं. इसका स्‍वास्‍थ्‍य पर बड़ा बुरा असर पड़ता है. वायु प्रदूषण को देखने के लिये एक छोटा सा प्रयोग किया जा सकता है. एक कागज़ पर वेसलीन लगाकर अगर उसे घर के बाहर टांग दिया जाये तो कुछ दिन में उस वेसलीन पर गंदगी की एक परत जम जाती है. यह वायु प्रदुषण के कारण है.

वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्‍टरियों से निकलने वाला धुआं, फसलों की पराली जलाने से उत्‍पन्‍न धुआं, निर्माण कार्यों की धूल आदि वायु प्रदेषण के महत्‍वपूर्ण कारण है. वायु प्रदूषण पर एक वीडियो देखिये -

स्‍मॉग - सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण हवा के नीचे के स्‍तर पर जमा हो जाता है जिससे पूरे वातावरण में धुआं भर जाता है. इसे ही स्‍मॉग कहते हैं. इसके कारण देखने में समस्‍या होती है और सांस की बीमारियां भी हा सकती हैं. हाल के वर्षो में दिल्‍ली और उत्‍तर भारत के शहरों में यह बढ़ता ही जा रहा है.

पौधाघर प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) - सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों में पौधों को एक कांच के भवन में उगाया जाता है जिसे ग्रीन हाउस कहते हैं. कांच में होकर सूर्य की गर्मी अंदर तो आ जाती है, परन्‍तु अंदर आने के बाद अंदर की वस्‍तुओं से टकराने के कारण गर्मी की तंरगों का दैर्घ्‍य बदल जाता है इसलिये वे दोबारा कांच को पार करके बाहर नहीं जा पातीं. इस कारण कांच के घर के अंदर गर्मी बढ़ जाती है. इसी को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं. वायुमंडल में भी जलवाष्‍प और कुछ गैसों के कारण सूर्य की गर्मी अंदर तो आ जाती है परन्‍तु बाहर नहीं जा पाती. कुछ हद तक तो यह जीवन के लिये अच्‍छा है परन्‍तु क्‍लोरोफलोरोकार्बन जैसी कुछ गैसों की अधिकता से यदि ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ जाये तो यह धरती को बेहद गर्म कर सकता है, जो हमारे लिये बुरा होगा. ग्रीन हाउस प्रभाव पर एक वीडियो देखिये -

अम्‍लवर्षा - वायुमंडल में प्रदूषण के कारण अम्‍लीय गैसों जैसे सल्‍फर डाई ऑक्‍साइड आद‍ि की मात्रा बढ़ जाती है. वर्षा के समय यह गैसें पानी में घुलनशील होने के कारण वर्षा के जल में मिलकर अम्‍ल बना देती हैं. इसे ही अम्‍लवर्षा कहते हैं. अम्‍ल मिट्टी की उर्वरक क्षमता को कम कर देते हैं. पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं. मिट्टी तथा जल में रहने वाले जंतुओं पर भी अम्‍लवर्षा का बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐतिहासिक इमारतों पर भी अम्‍ल बुरा असर डालता है

वायुमंडलीय दाब - वायु में भी भार होता है. इस भार के कारण वायु पृथ्‍वी पर दबाव डालती है. इसे ही वायुमंडलीय दाब कहते हैं. ऊंचाई पर जाने से ऊपर की हवा कम हो जाती है और इसलिये उसका भार भी कम हो जाता है. इसीलिये ऊंचे स्‍थानों पर वायुमंडलीय दाब कम होता है.

हम यह सोच सकते हैं कि यदि वायु में दाब होता है तो हम और हमारे आस-पास की वस्‍तुएं इस दाब से पिचक क्‍यों नहीं जातीं? इसका कारण यह है कि हमारे शरीर तथा आस-पास की वस्‍तुओं के भीरत भी वायु होती है और इसलिये अंदर और बाहर का दाब एक समान होने के कारण हम और अन्‍य वस्‍तुएं पिचकते नहीं हैं. यदि हम किसी वस्‍तु के अंदर की हवा को निकाल दें तो वह बाहर के दाब से पिचक जायेगी. इसे एक गतिव‍िध‍ि के माध्‍यम से देखें -

बहुत सी अन्‍य बातों का प्रभाव भी वायुमंडलीय दाब पर पड़ता है. इसके संबंध में एक वीडियो देखिये -

वायुमंडलीय दाब का मापन - वायुमंडलीय दाब का मापन बैरोमीटर नामक यंत्र से किया जाता है. आइये हम कक्षा में ही बैरोमीटर बनाने की विधि अभिषेक शुक्‍ला जी से सीखें -

6

Add Your Comments Here

Comments :

Sushil Rathod On: 29/07/2020

विज्ञान जैसे विषय में इतना सुंदर कंटेंट पहली बार देखा है एवम गतिविधियां किसी भी पाठ को कितना जीवंत बना सकती है यह अनुभव भी पहली बार किया है। इस अध्याय में गतिविधि आधारित वीडिओज़ तो वह नायाब मोती है जिन्हें न जाने किस गहराई से निकाला गया होगा। पाठ का पहला ही वीडियो ...सचमुच् अदभुत है। इसमें वायु स्थान घेरती है, वायु का भार होता है, वायु में ऑक्सीजन, कॉर्बन डाई ऑक्साइड, जलवाष्प की उपास्थिति होती है , इन्हें छोटे छोटे प्रयोगों से समझाया गया है। एक दो या शायद अधिक, पीढियां ऐसी ही निकल गई जिसने Let s Learn by Doing या आओ करके सीखे को इतना ही समझा और जाना कि बस ... यह हमारी किताब का नाम है। प्रश्नों का उत्तर रटते गए, लिखते गए , परीक्षाएं पास करते गए ....पर फैल हो गया, गुम हो गया उनके भीतर का वैज्ञानिक.. जिसे कुछ करके सीखने का कभी मौका ही नहीं मिला। काश! मुझे भी ऐसे शिक्षक मिलते जो इस अध्याय के गुरुजी की तरह ऑक्सीजन बनाना सिखाते.....तो शायद मैं इस रटी हुई बात से ज़्यादा जान पाता कि ऑक्सीजन प्राणवायु है और इसका सूत्र O2 है। वायुमंडलीय दाब और उसके मापन को समझाती गतिविधियां बेहद शानदार है। गतिविधियों में बच्चों की शिरक़त ही गतिविधियों को मायने देती है। शिक्षक बनने के बाद शिक्षक का वज़ूद उसके विद्यार्थी से हैं। बिना विद्यार्थियों के उसका आंकलन बेमानी हैै। मुझे विश्वास है कि इस अध्याय का प्रस्तुतिकरण हर एक विज्ञान शिक्षक की प्रेरणा बनेगा। सुशील राठोड़

Rukmani Sori ms potiya cluster hirri block dhamdha durg On: 28/07/2020

Very nice sir ji great work 6th 7th 8th ka Jarurat hai taki ham bachcho ko padaha sake

Visitor No. : 2461441
Site Developed and Hosted by Alok Shukla