महिला सशक्तीकरण
Women Empowerment
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महिला सशक्तीकरण - (हिन्‍दी में)

Women Empowerment - (In English)

महिला सशक्तीकरण

पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर नहीं मिलते हैं. आज के अधुनिक समाज में भी महिलाओं को घरेलू प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. लड़कियों के साथ भेद-भाव किया जाता है. कई राज्यों में बालिका भ्रूण हत्या की घटनाएं अभी भी होती हैं. कई परिवारों में बालिकाओं के साथ इतना भेदभाव किया जाता है कि उन्हें भरपेट भोजन तक नहीं मिलता. महिलाएं अधिकतर पुरुषों के भोजन कर लेने के बाद बचा हुआ भोजन ही करती हैं. इन सब कारणों से भारत में महिलाओं की मृत्यु दर पुरुषों की मृत्यु दर से अधिक है. विश्व आर्थिक मंच व्दारा 2017 में जारी लिंग अंतर सूचकांक के अनुसार भारत का रैंक 144 देशों में 108 वां है. पिछले वर्ष भारत का रैंक 87 वां था और एक वर्ष में भारत 21 स्थान फिसल गया है. इस सूचकांक की गणना (i) शैक्षणिक प्राप्ति, (ii) स्वास्थ्य और उत्तरजीविता, (iii) आर्थिक अवसर और (iv) राजनीतिक सशक्तिकरण के आधार पर की जाती है. भारत के लिए यह सूचकांक वर्ष 2016 में 0.683 था जो 2017 में घटकर 0.669 हो गया है. इसमें पहला स्थान आइसलैंड का है जिसके लिये यह सूचकांक 0.878 है. इसमें भी स्वास्थ्य और उत्तरजीविता के क्षेत्र में भारत की हालत बदतर है और उसका स्थान इस क्षेत्र में नीचे से चौथा है.

लिंग अनुपात

भारत में लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 943 महिलाओं का है. चिंता का विषय यह है कि 0 से 6 वर्ष की आयु का लिंग अनुपात (बाल लिंग अनुपात) और भी कम 1000 पुरुषों पर 919 महिलाओं का हैं. इसका अर्थ यह हुआ कि हमारा समाज बालिकाओं के साथ इतना बुरा व्यवहार करता है कि जन्म के कुछ ही समय के भीतर बहुत बड़ी संख्या में बालिकाओं की मृत्यु हो जाती है. छत्तीसगढ़ में लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 991 महिलाओं का है और बाल लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 969 महिलाओं का है. महिलाओं के पक्ष में सबसे अच्छा लिंग अनुपात बस्तर ज़ि‍ले में 1024, दंतेवाड़ा में 1022, महासमुंद में 1018, राजनांदगांव में 1017, धमतरी में 1012, कांकेर में 1007, जशपुर में 1004 है. वहीं सबसे खराब लिंग अनुपात कोरि‍या में 971, कोरबा में 971, बिलासपुर में 972, सरगुजा में 976, बीजापुर में 982 और रायपुर में 983 है.

2011 की जगणना के अनुसार छत्तीसगढ में जिलेवार लिंग अनुपात निम्नानुसार है – कोरिया 971, सरगुजा 976, जशपुर 1004, रायगढ़ 993, कोरबा 971, जांजगीर-चांपा 986, बिलासपुर 972, कबीरधाम 997, राजनांदगांव 1017, दुर्ग 988, रायपुर 983, महासमुंद 1018, धमतरी 1004, कांकेर 1007, बस्तर 1024, नारायणपुर 998, दंतेवाड़ा 1022 और बीजापुर 982 है.

महत्वपूर्ण आंकड़े

  1. जनगणना 2011 में अनुसार छत्तीगसढ़ में पुरुष साक्षरता दर 80.27% एवं महिला साक्षरता दर 60.24% है.
  2. एन.एफ.एच.एस – 4 (2015-16) के अनुसार छत्तीसगढ़ में –
    1. केवल 21.7% महिलाओं को पूर्ण प्रसव पूर्व सेवाएं मिली हैं.
    2. 66.2% महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना में सहायता मिली है.
    3. केवल 70.2% प्रसव स्वासथ्य केन्द्र या अस्पताल में हुए हैं और केवल 55.9% प्रसव ही सरकारी स्वासथ्य केन्द्र् अथवा अस्पताल में हुए हैं.
    4. 26.7% महिलाओं का बाडी मास इंडैक्स समान्य से कम है (18.5 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम).
    5. 15 से 49 साल की आयु की 47% महिलाएं खून की कमी से पीड़ि‍त हैं, जबकि इस आयुवर्ग के 22.2% पुरुषों में भी खून की कमी है.
    6. केवल 36.8% महिलाओं को ही पिछले 1 वर्ष में रोज़गार के लिये नकद राशि का भुगतान मिला था.
    7. केवल 26.4% महिलाओं के पास ही अचल संपत्ति का अकेले अथवा संयुक्त रूप से मालिकाना हक था.
    8. केवल 47.1% महिलाएं ही मासिक धर्म के समय कोई सेनेटरी नेपकिन का उपयोग करती हैं.
    9. 36.7% महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा है जो एन.एफ.एच.एस. – 3 के 29.9% की तुलना में 6.8% अधिक है. घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी चिंता का विषय है.
  3. नीति आयोग के डेटा के अनुसार मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की मातृ मृत्यु दर 2014-16 में 173 प्रति 1000 जन्म‍ थी जो भारत की मातृ मृत्यु दर 130 प्रति 1000 जन्म की तुलना में बहुत अधिक है.
  4. आक्सपफेम व्दारा नवंबर 2017 में जारी दस्तावेज़ पालिसी ब्रीफ – जेंडर डेवलपमेंट इन छत्तीसगढ़ – सम पालिसी प्रिसक्रिप्शन्स के अनुसार छत्तीसगढ़ में महिलाओं के लिये बजट प्रावधान वर्ष 2015-16 में 9564 करोड़ रुपये था जो कुल बजट का 14.7% और ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का 3.7% था. वर्ष 2016-17 में यह बजट प्रावधान कम होकर 8498 करोड़ रुपये रह गया जो कुल बजट का 11.2% और ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का 2.9% है. इसी दस्तासवेज़ के अनुसार वर्ष 2015-16 में प्रावधानित राशि में से 31.5% का उपयोग नहीं हो सका.

महिला सशक्तीकरण के अंग

सामान्य रूप से महिला सशक्तीकरण के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के सशक्तीकरण आते हैं –

  1. सामाजिक सशक्तीकरण महिलाओं को समाज में पुरुषों के समान स्थान मिले और विकास के समान अवसर मिलें. परिवार में महत्वपूर्ण निर्णय महिलाओं की सहमति से लिये जाएं. इसके लिए सरकार ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने की योजनाएं – जैसे सरस्वती साइकिल योजना, बालिकाओं के लिये नि:शुल्क शिक्षा की योजना आदि चलाए हैं. परिवार के भीतर हिंसा से संरक्षण के लिये भी विशेष अधिकारी तथा विशेष नयायालय बनाए गए हैं. समाज में महिलाओं के विरुध्द अपराधों पर नियंत्रण के लिये थानों मे विशेष व्यजवस्था की गई है और महिला थाने भी बनाए गए हैं. योन अपराधों के विरुध्द कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है.
  2. शैक्षणिक सशक्तीकरण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं.
  3. आर्थिक सशक्तीकरण महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें इसके लिये अनेक प्रयास किए जा हैं. स्व-रोज़गार के लिए प्रशिक्षण तथा कौशल विकास की योजनाएं हैं. स्वरोज़गार के लिये ऋण तथा अनुदान दिया जाता है. महिला स्व-सहायता समूहों के माध्ययम से भी स्वरोज़गार के अवसर निर्मित किए जाते हैं. छत्तीसगढ़ में आंगनबाडि़यों में पोषण आहार तथा स्कू्लों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था महिला स्व–सहायता समूहों व्दारा की जा रही है. भूमि पट्टा आबंटन में पति एवं पत्नी दोनो का नाम लिखने का नियम बनाया गया है. राशन कार्ड में परिवार के मुखिया के रूप में पहिला का नाम अंकित करने का नियम बनाया गया है.
  4. राजनीतिक सशक्तीकरण पंचायतों एवं नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण किया गया है. शासकीय सेवा में भी महिलाओं के लिये 33% आरक्षण की व्यवस्था है.

महिला सशक्तीकरण के संबंध में संवैधानिक प्रावधान

  1. अनुच्छेद 14 – विधि के समक्ष समानता.
  2. अनुच्छेद 15 (1) – राज्य लिंग के आधार पर पर किसी नागरिक से विभेद नहीं करेगा.
  3. अनुच्छेद 15 (3) – राज्यव राज्य महिलाओं के पक्ष में विशेष प्रवधान कर सकेगा.
  4. अनुच्छेद 16 (2) – राज्य की सेवाओं में के साथ लिंग के आधार पर विभेद नहीं किया जाएगा.
  5. अनुच्छेद 23 (1) – ह्यूमन ट्रैफिकिंग एवं बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध.
  6. अनुच्छेद 39 (क) – राज्य आजीविका के लिये महिलाओं एवं पुरुषों के लिये एक समान अधिकार सुनिश्चित करेगा.
  7. अनुच्छेद 39 (ङ) राज्य महिलाओं एवं पुरुषों के लिये समान कार्य के लिये समान वेतन सुनिश्चित करेगा.
  8. अनुच्छे्द 42 – राज्य कार्य और मातृत्व राहत की मानवीय स्थितियों के लिए प्रावधान करेगा.
  9. अनुच्छेनद 51-क(ङ) – महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक प्रथाओं को त्यागना भारत के हर नागरिक का कर्तव्य होगा.
  10. अनुच्छेद 243-घ(3) – पंचायतों के एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिये आरक्षित होंगे.
  11. अनुच्छेद 243-घ(4) – सभी स्तरों पर पंचायतों के अध्यक्षों के एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिये आरक्षित होंगे.
  12. अनुच्छेद 243-म(3) – नगरीय निकायों के सीधे निर्वाचन से भरे जाने वाले एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिये आरक्षित होंगे.
  13. अनुच्छेद 243-म(4) – नगरीय निकायों के अध्यक्षों के पदो पर महिलाओं के आरक्षण के लिये राज्यों की विधान सभाएं प्रवधान कर सकेंगी.

महिलाओं के संरक्षण के लिये अन्य विधिक प्रावधान

  1. मातृत्व लाभ अधिनियम 1961
    1. कोई महिला प्रसव या गर्भपात के तुरन्त बाद छ: सप्ताह तक कार्य नहीं करेगी.
    2. महिला का हक और नियोक्ता का दायित्व कि औसत दैनिक मजदूरी की दर से प्रसव के दिन सहित छ: सप्ताह तक के लिए उसे मातृत्व लाभ का भुगतान किया जाएगा.
    3. उल्लंघन करने पर नियोक्ता को कारावास या जुर्माना दोनों हो सकता है.
    4. अधिनियम में हाल के संशोधन –
      1. दो बच्चों के लिए मातृत्व लाभ की सुविधा 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह और दो से अधिक बच्चों के लिए 12 सप्ताह.
      2. ‘कमिशनिंग मदर’ और ‘एडोप्टिंग मदर’ के लिए 12 सप्ताह का मातृत्व लाभ.
      3. घर से काम करने की सुविधा.
      4. 50 या उसके अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में क्रेच का अनिवार्य प्रावधान.
  2. अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956
  3. गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति अधिनियम, 1971 (एमटीपी एक्ट)
  4. कन्या भ्रूण हत्या से जुड़े क़ानूनी प्रावधान
    1. प्री-कॉन्सेप्शन और प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (सेक्स चयन का निषेध) अधिनियम 1994 – (पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम) – इस अधिनियम में लिंग परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा अल्ट्रा साउंड मशीनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. अधिनियम के तहत निम्नलिखित कार्य प्रतिबंधित हैं –
      1. लिंग चयन या लिंग का पूर्व-निर्धारण की सेवा देने वाले विज्ञापनों का प्रकाशन;
      2. गर्भाधान-पूर्व या जन्म-पूर्व परीक्षण तकनीकों वाले क्लीनिकों का पंजीकृत नहीं होना या क्लिनिक या संस्थान के भीतर सबको दिखाई देने वाले पंजीकरण प्रमाणपत्र को प्रदर्शित नहीं करना;
      3. अजन्मे बच्चे के लिंग का निर्धारण करना;
      4. गर्भवती को लिंग निर्धारण परीक्षण के लिए मजबूर करना;
      5. लिंग चयन की प्रक्रिया में सहयोग या सुविधा प्रदान करना;
      6. चिकित्सक व्दारा गर्भवती या अन्य व्यक्ति को अजन्मे बच्चे के लिंग के बारे में किसी भी तरह सूचित करना;
      7. पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत क्लीनिकों व्दारा अभिलेखों को भली-भांति सहेज कर नहीं रखना.
    2. भारतीय दंड संहिता –
      1. धारा 312 – ‘जो कोई भी जानबूझकर किसी महिला का गर्भपात करता है जब तक कि कोई इसे सदिच्छा से नहीं करता है और गर्भावस्था का जारी रहना महिला के जीवन के लिए खतरनाक न हो, उसे सात साल की कैद की सजा दी जाएगी’.
      2. धारा 314 – महिला की सहमति के बिना गर्भपात की कोशिश के कारण महिला की मृत्यु.
      3. धारा 315 – मां के जीवन की रक्षा के प्रयास को छोड़कर अगर कोई बच्चे के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिससे जीवित बच्चे के जन्म को रोका जा सके या पैदा होने का बाद उसकी मृत्यु हो जाए, उसे दस साल की कैद होगी.
      4. धारा 316 – अजन्मे बच्चे की हत्या करना.
      5. धारा 317 – नवजात शिशु को त्याग देना
      6. धारा 318 – बच्चे के मृत शरीर को छुपाना या इसे चुपचाप नष्ट करना
  5. कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह अधिनियम लागू होता है. ये अधिनियम विशाखा केस में दिये गये लगभग सभी दिशा-निर्देशों को धारण करता है और ये बहुत से अन्य प्रावधानों को भी निहित करता है जैसे: शिकायत समितियों को सबूत जुटाने में सिविल कोर्ट वाली शक्तियाँ प्रदान की है; यदि नियोक्ता अधिनियम के प्रावधानों को पूरा करने में असफल होता है तो उसे 50,000 रुपये से अधिक अर्थदंड भरना पड़ेगा, ये अधिनियम अपने क्षेत्र में गैर-संगठित क्षेत्रों जैसे ठेके के व्यवसाय में दैनिक मजदूरी वाले श्रमिक या घरों में काम करने वाली नौकरानियाँ या आयाएं आदि को भी शामिल करता है. हांलाकि, इस अधिनियम में कुछ कमियां भी है जैसे कि ये यौन उत्पीड़न को अपराध की श्रेणी में नहीं रखता बस केवल नागरिक दोष माना जाता है जो सबसे मुख्य कमी है, जब पीड़िता इस कृत्य को अपराध के रुप में दर्ज करने की इच्छा रखती है तब ही केवल इसे एक अपराध के रुप में शिकायत दर्ज की जाती है, इसके साथ ही पीड़िता पर अपने वरिष्ठ पुरुष कर्मचारी द्वारा शिकायत वापस लेने के लिये दबाव डालने की भी संभावनाएं अधिक रहती है.
  6. दहेज निषेध अधिनियम, 1961.
  7. महिला अश्लील प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986
  8. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976
  9. मुस्लिम विवाह का विघटन अधिनियम, 1939 मुस्लिम पत्नी को विवाह के विघटन का अधिकार देता है.
  10. मुस्लिम महिलाएं (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986
  11. भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम (1872)
  12. हिन्दू विवाह अधिनियम पति एवं पत्नी को विवाह एवं तलाक में एक समान अधिकार. एक से अधिक विवाह पर प्रतिबंध. तलाक की स्थिति में पति की हैसियत के हिसाब से गुज़ारा भत्ता. पति की स्वअर्जित संपत्ति में हक.
  13. हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम पिता की संपत्ति में बेटी का अधिकार.
  14. पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984- पारिवारिक विवादों के शीघ्र निराकरण के लिये परिवार न्यायालयों की स्थापना के संबंध में.
  15. भारतीय दंड संहिता के कुछ अपराधों में विशेष प्रावधान
    1. बलात्कातर – बलात्कार केस में पीड़िता का नाम छुपाने का नियम, सुनवाई महिला जज व्दारा, पीड़ि‍ता का बयान महिला पुलिस अधिकारी व्दारा एवं महिला के परिजनों की मौजुदगी में, केस की सुनवाई 2 माह में पूरा करने का प्रयास. रेप के कुछ मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान.
    2. दहेज हत्या
    3. क्रूरता और उत्पीड़न
  16. दंड प्रक्रिया संहितारात में गिरफ्तार न न होने का अधिकार, धारा 125 – पति व्दारा गुजारा भत्ताा
  17. नि:शुल्क कानूनी सहायता
  18. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 महिला एवं पुरुष को समान कार्य के लिये समान वेतन.
  19. अन्य अधिनियम –
    1. खान अधिनियम, 1952 – 7 बजे शाम से 6 बजे सुबह तक महिलाओं का खानों एवं कारखानों में कार्य का प्रतिषेध.
    2. बंधुआ मजदूरी उन्मूनलन अधिनियम, 1976.
    3. भारतीय तलाक अधिनियम, 1869.
    4. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872.
    5. हिन्दू गोद लेना एवं गुजारा अधिनियम, 1956.

राष्ट्रीय महिला आयोग

महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 (भारत सरकार की 1990 की अधिनियम सं. 20) के अंतर्गत जनवरी 1992 में संवैधानिक निकाय के रूप में निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए की गई थी:

  1. महिलाओं के लिए संवैधानिक और कानूनी संरक्षण की समीक्षा करना;
  2. सुधारात्मक वैधानिक उपायों की अनुशंसा;
  3. शिकायतों के सुधार की सुविधा प्रदान करना और
  4. महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत तथ्यों पर सरकार को सलाह देना

पहले आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को अध्यक्ष के रूप में श्रीमती जयंती पटनाइक के नेतृत्व में हुआ. दूसरे आयोग का गठन जुलाई 1992 को अध्यक्ष के रूप में डॉ. (श्रीमती) मोहिनी गिरी के नेतृत्व में हुआ. तीसरे आयोग का गठन जनवरी 1999 को अध्यक्ष के रूप में श्रीमती विभा पार्थसारथी के देखरेख में हुआ. चौथे आयोग को जनवरी 2002 में गठित किया गया और सरकार ने डॉ. पूर्णिमा आडवानी को अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया. पांचवें आयोग को फरवरी 2005 में गठित किया गया और सरकार ने डॉ. गिरिजा व्यास को अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया.

राष्ट्रीय महिला आयोग के अभी तक के कार्यों का लेखा-जोखा –

  1. महिलाओं और उनके सशक्तीकरण के मूल्यांकन के लिए ‘जेंडर प्रोफाइल’ तैयार किया.
  2. बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त की और अपनी ओर से अनेक मामलों में शीघ्रता से न्याय के काम किए
  3. बाल विवाह का मुद्दा उठाया.
  4. वैधानिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया.
  5. पारिवारिक महिला लोक अदालतों की स्थापना और कानूनों जैसे दहेज निषेध अधिनियम 1990, PNDT अधिनियम 1994, इंडियन पैनल कोड 1860 और राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 की समीक्षा की ताकि उन्हें अधिक कठोर और प्रभावी बनाया जा सके.
  6. लैंगिक जागरूकता के लिए वर्कशॉप/सेमिनार का आयोजन और मादा भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति हिंसा, इत्यादि के खिलाफ जन अभियान चलाए ताकि इन सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध समाज में जागरूकता बन सके.

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग

प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने महिलाओं के हितों की देखभाल व उनका संरक्षण करने महिलाओं के प्रति भेदभाव व्यवस्था को समाप्त करने, हर क्षेत्र में उन्हें विकास के सामान अवसर दिलाने एवं महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों, अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए छ.ग.राज्य महिला आयोग अधिनियम 1995 की धारा 03 के प्रावधानुसार राज्य महिला आयोग का गठन किया गया.

अधिनियम के प्रावधानानुसार आयोग में 01 अध्यक्ष एवं 06 सदस्य होंगे. इसके अतिरिक्त एक शासकीय अधिकारी भी होगा जो आयोग का सचिव होगा. अध्यक्ष एवं सदस्य का कार्यकाल 03 वर्ष का होगा. वर्तमान में राज्य महिला आयोग में मान. श्रीमती हर्षिता पाण्डेय अध्यक्ष एवं श्रीमती खिलेश्वरी किरण सदस्य है.

छ.ग. राज्य महिला आयोग के प्रमुख कार्य दायित्व निम्नानुसार हैं –

  1. महिलाओं के लिए संविधान तथा अन्य विनियमों के अधीन प्रावधानित संरक्षणों से संबंधित मामलों का अन्वेषण एवं परीक्षण करना.
  2. संविधान एवं अन्य विनियमों में महिलाओं के संरक्षण हेतु किये गये उपबंधों के उल्लंघन के मामलों कों प्राधिकारियों तक ले जाना.
  3. महिलाओं के संरक्षणों के कार्यान्वयन पर सरकार को प्रतिवेदन देना.
  4. महिलाओं के आर्थिक सामाजिक विकास की योजना तैयार करने की प्रक्रिया में भाग लेना.
  5. महिलाओं के ऐसे मुकदमों जो महिलाओं के बड़े समूह पर प्रभाव डालते है को धन देना.
  6. महिलाओं की आर्थिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य संबंधी स्थिति पर गहन अध्ययन करना.
  7. महिलाओं की कार्य स्थलों, महिला बंदीगृहों, महिला सुधार गृहो महिला आश्रय गृहों का निरीक्षण करना एवं स्थिति में सुधार हेतु सरकार को सिफारिश करना.
  8. महिलाओं के विरूद्ध अपराधों की यथा विवाह दहेज, बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़, अनैतिक व्यापार, प्रसव एवं नसबंदी के समय चिकित्सकीय उपेक्षा आदि पर जानकारी संकलित करना.
  9. शिकायतें प्राप्त करना:-
    1. महिलाओें पर अत्याचार एवं अपराध के विरूध्द
    2. न्यूनतम मजदूरी, प्राथमिक स्वास्थ्य, प्रसुति सुविधा से वंचित करने के विरूध्द
    3. महिलाओं के संबंध में राज्य सरकार के नीतिगत विनिश्यों का पालन न करने के संबंध में
    4. परित्यक्त एवं निराश्रित महिलाओं के पुनर्वास संबंधी शिकायतें
  10. महिलाओं को उनके अधिकारों एवं कानूनों के प्रति जानकारी प्रदान करना, संगोष्ठी सेमीनार, शिविर का आयोजन करना.
  11. मीडिया के विभिन्न माध्यमों से प्रकाशित होने वाले महिला उत्पीड़न की घटनाओं का स्वतः संज्ञान में लेना.

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तीकरण की योजनाएं

  1. एकीक्रत बाल विकास योजना सन 1975 में लागू की गयी. वर्तमान में केद्र सरकार इस योजना का 90% खर्च वहन करती है बाकी का राज्य करते हैं. इस योजना का क्रियांवयन आंगनबाड़ी केन्द्रों व्दारा किया जाता है. योजना के अंतर्गत निम्नलिखित सेवाएं दी जाती हैं –
    1. टीकाकरण
    2. पूरक पोषण आहार – 0 से 6 साल के बच्चों को 300 दिन की अवधि के लिए पूरक पोषण आहार दिया जाता है जिसमें प्रतिदिन 500 कैलोरी ऊर्जा और 12 से 15 ग्राम प्रोटीन होता है. स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं को भी पूरक पोषण आहार दिया जाता है जिसमे 600 कैलोरी ऊर्जा और 18 से 20 ग्राम प्रोटीन होता है.
    3. नियमित स्वास्‍थ्‍य जांच
    4. रेफरल सेवा
    5. स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा
    6. पोषण एवं स्वास्‍थ्‍य संबंधी जानकारी
  2. राजीव गांधी किशोरी सशक्तीकरण योजना (सबला) श्रीमती इंदिरा गांधी के जन्मदिवस 19 नवंबर 2010 से प्रारंभ. इसका उद्देश्‍य 11 से 18 आयु वर्ष की किशोरियों को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करके सशक्त बनाना है: पोषण, आयरन एवं फोलिक एसिड प्रतिपूरक, स्वास्थ्य जांच तथा रेफरल सेवाएं, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा, परिवार कल्याण पर परामर्श, गृह प्रबंधन. 16 वर्ष एवं इससे अधिक आयु की लड़कियों के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण
  3. सुखद सहारा योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली 18-39 वर्ष आयुवर्ग की विधवा एवं 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के परित्यक्ता महिलाओं को 350 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है. स्वीक्रति के अधिकार जनपद पंचायत को हैं.
  4. महतारी जतन योजना 3 मई 2016 को ग्राम सलगवाकला, कोरिया ज़िले से प्रारंभ. आंगनबाड़ी केन्द्रों में सप्ताह में 6 दिन गर्भवती महिलाओं को गर्म पौष्टिक भोजन दिया जाता है.
  5. मुख्यमंत्री राजश्री योजना बिटिया के जन्म पर मिलेंगे 50 हजार रुपए. यह राशि माँ के खाते में आएगी. बालिका जन्म के समय – 2,500 रुपये, बालिका के पहले जन्मदिन पर – 2,500 रुपये, पहली कक्षा में प्रवेश लेने पर – 4,000 रुपये, छठी कक्षा में प्रवेश लेने पर – 5,000 रुपये, 10 वी कक्षा में प्रवेश लेने पर – 11,000 रुपये और 12 वी कक्षा पास करने पर – 25,000/- रुपये मिलेंगे.
  6. महतारी एक्सप्रेस योजना शिशुओं और गर्भवती माताओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने और इलाज की जरूरी सुविधा दिलाने के लिये नि:शुल्क परिवहन की योजना.
  7. सुचिता योजना इस योजना के तहत सरकार छत्तीसगढ़ सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन प्रदान करेगी.
  8. संगवारी योजना इस योजना के तहत महिलाओं को घर के काम, झाड़ू-पोछा, वाशिंग मशीन व वेक्यूम क्लीनर चलाना, फ्रिज साफ करना आदि सिखाया जाएगा. चयनित महिलाओं का पुलिस वेरिफिकेशन भी करवाया जाएगा. योजना के तहत प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद, नगर निगम एक टेलीफोन नंबर भी जारी करेगा. जरूरतमंद व्यक्ति के फोन करने पर उसके मकान के आसपास रहने वाली प्रशिक्षित बाई को अगले दिन ही भेज दिया जाएगा.
  9. मुख्ययमंत्री शिशु शक्ति एवं महतारी शक्ति आहार रेडी टु ईट आहार के निर्माण का काम महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है.
  10. आयुष्मती योजना गरीब महिलाओं के अस्पताल में भर्ती होने पर एक सप्ताह तक भर्ती होने पर 400 रुपये इससे अधिक भर्ती होने पर 1000 रुपये की सहायता दी जाती है.
  11. मुख्यीमंत्री कन्यादान योजना निर्धन परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिये कुल 15000 रुपये (11500 रुपये की सामग्री तथा 3500 रुपये नकद) दी जाती है. यह योजना 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम 2 कन्याओं के विवाह के लिये है.
  12. सखी वन स्टाप सेंटर महिलाओं के विरुध्द अपराधों की रोकथाम के लिये 2015 से संचालित. इसमें चिकित्सा, विधिक परामर्श, मनोवैज्ञानिक परामर्श आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं. टोल फ्री नंबर के माध्यम से महिला हेल्प लाइन की व्यवस्था भी है. इसमें 5 बेड होते हैं और पीड़ि‍त महिलाओं के 5 दिन तक रहने की व्यवस्था होती है. इससे अधिक की आवश्यकता होने पर महिला को नारी निकेतन आदि भेजा जा सकता है.
  13. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना यह भारत सरकार की योजना है जिसे लिंग विभेद मिटाने के उद्देश्य से 2015 में प्रारंभ किया गया. इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ में विभिन्न योजनाएं संचालित हैं –
    1. छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना इस योजना के तहत 1 अप्रैल, 2014 के बाद पैदा हुई गरीबी रेखा से नीचे की लड़कियों को जन्म के समय 5000 रुपये तथा आगामी 5 वर्षों तक 5000 रुपये प्रतिवर्ष (कुल 25000 रुपये) प्रीमियम के रूप में दिये जाते हैं. 18 वर्ष तक विवाह न होने पर एवं 12वी तक की शिक्षा पूर्ण करने पर परिपक्वता पर 1 लाख रुपये की राशि दी जाती है.
    2. सुकन्या समृध्दि योजना 22 जनवरी 2015 से लागू. कन्या के जन्म पर न्यूनतम 1000 रुपये से किसी भी बैंक अथवा पोस्ट आफिस में खाता खोला जा सकता है. 14 वर्षों तक राशि जमा करना आवश्यक है. अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं. 8 से 9 प्रति‍शत ब्याज मिलता है. 21 वर्ष की आयु में परिपक्वता पर राशि आहरित कर सकते हैं.
    3. मुख्यमंत्री अमृत योजना आंगनबाड़ी केन्द्र में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को अप्रेल 2016 से 100 मिलीलिटर मीठा सुगंधित दूध प्रति सोमवार को दिया जाता है.
    4. प्रधान मंत्री मातृवंदन योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत 1 जनवरी 2017 से पूरे देश में लागू. इसका उद्देश्य महिलाओं को कुपोषण से बचाना है. शासकीय सेवा में सेवारत महिलाओं को छोड़कर अन्य सभी गर्भवती एवं नवप्रसूता महिलाओं को 5000 रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है.
  14. उज्जवला योजना 13 अगस्त 2016 से लागू. एस.ई.सी.सी. के अनुसार गरीबी रेखा के नीचे के हितग्राहियों को मात्र 200 रुपये के अंशदान पर नि:शुल्क गैस कनेक्शन दिया जाता है. अभी तक छत्तीसगढ़ में 22 लाख कनेक्शन दिये जा चुके है.
  15. छत्तीसगढ़ महिला कोष
    1. महिला स्व-सहायता समूहों को आसान शर्तों पर ऋण उपलव्ध कराने के लिये 2003 से संचालित. महिला स्व–सहायता समूह को उनकी बचत राशि का 10 गुना तक एवं अधिकतम 50000 रुपये का ऋण मात्र 3 प्रतिशत ब्याज पर दिया जाता है. एक बार ऋण वापस करने पर 2 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा सकता है.
    2. सक्षम योजना – 2009-10 में प्रारंभ. महिला कोष व्दारा 35 से 45 वर्ष की विधवा, परित्यक्ता महिलाओं को 1 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है.
    3. स्वावलंबन योजना – 2009-10 में प्रारंभ. स्व-रोज़गार के लिये महिलाओं को प्रशिक्षण देने की योजना.

Women Empowerment

Women do not get equal opportunity because our society is male dominated. Even today women have to face domestic violence. There is discrimination against girls. In many States there are still incidents of female feticide and infanticide. In some families discrimination against the girl child is so much that they do not get enough to eat. Women eat the leftovers after men of the family have eaten. For these reasons the death rate of women is higher then men in India. The rank of India for gender gap index calculated by World Economic Forum is 108 in 144 countries. India has slipped by 21 ranks as compared to last year when it was ranked 87th. This index in calculated on the basis of (i) Education achievements, (ii) Health and survival, (iii) economic opportunities and (iv) political empowerment. The gender gap index for India in 2015 was 0.683 which was reduced to 0.669 in 2017. Iceland is at the first place with a gender gap index of 0.878. The status of India in Health and survival is worst with the rank of India in this indicator being fourth from bottom.

Sex Ratio

The sex ratio of India is 1000 males for 943 females. It is a matter of concern that the sex ratio of children 0 से 6 years (child sex ratio) is worse at 1000 males for 919 females. It means that our society treats girls so bad that many girls die within a few years of birth. The sex ratio of Chhattisgarh is 1000 males for 991 females. The child sex ratio of Chhattisgarh is 1000 males for 969 females. The sex ratio of Bastar is in favour of women at 1024, Dantewada 1022, Mahasamund 1018, Rajnandgaon 1017, Dhamtari 1012, Kanker 1007 and Jashpur 1004. The worst sex ratio in Chhattisgarh is 971 in Koria, 971 in Korba, 972 in Bilaspur, 976 in Surguja, 982 in Bijapur and 983 in Raipur.

The district wise sex ratio of Chhattisgarh as per 2011 census is – Koria 971, Surguja 976, Jashpur 1004, Raigarh 993, Korba 971, Janjgir-Champa 986, Bilaspur 972, Kabirdham 997, Rajnandgaon 1017, Durg 988, Raipur 983, Mahasamund 1018, Dhamtari 1004, Kanker 1007, Bastar 1024, Narayanpur 998, Dantewada 1022 and Bijapur 982.

Important Statistics

  1. As per census 2011 male literacy in Chhattisgarh is 80.27% and female literacy is 60.24%.
  2. As per NFHS – 4 (2015-16) the statistics for Chhattisgarh are–
    1. Only 21.7% women received full ante natal services.
    2. 66.2% women received assistance under Janani Suraksha Yojna.
    3. Only 70.2% labour have taken place in health centres and hospitals and only 55.9% labour have taken place in Government Institutions.
    4. The Body Mass Index (BMI) of 26.7% women is less than normal (18.5 kg/M2).
    5. 47% women of 14 to 49 years age are anaemic while 22.2% men in this age group are also anaemic.
    6. Only 36.8% women were paid wages in cash in the last one year.
    7. Only 26.4% women have ownership rights in house of land alone or jointly.
    8. Only 47.1% women use a sanitary napkin during periods.
    9. 36.7% women faced domestic violence which is 6.8% higher than the figure of 29.9% of previous year. This is matter of concern.
  3. According to the data of Niti Ayog the Maternal Mortality Rate of Madhya Pradesh-Chhattisgarh in 2014-16 was 173 per 1000 births which is much higher as compared to 130 per 1000 births for India.
  4. According to the Policy Brief – Gender Development in Chhattisgarh – Some Policy prescriptions, document released by OXFAM in November 2017, the budget provision for women in Chhattisgarh for the year 9564 crore rupees in 2015-16 which was 14.7% of total budget and 3.7% of SGPD. This was reduced to rupees 8498 crore in 2015-16 which is only 11.2% of total state budget and 2.9% of SGDP. According to this document 31.5% of the budget provision of 2015-16 remain unutilized.

Areas of Women Empowerment

Following types of empowerment is generally mentioned –

  1. Social Empowerment Women should get equal opportunity as men for development. They should have an equal say in decision making in the family. For this schemes of education for girl child are necessary e.g. Saraswati Cycle scheme, free education for girls etc. Special officers and special courts for Protection of women from domestic violence. Special provisions have been made for control of crimes against women in the society. For this purpose, special women police stations have also been made. Severe punishment has been provided for sexual offences.
  2. Educational Empowerment Efforts are being made for equal opportunities of education for girls.
  3. Economic empowerment Many efforts are being made for economic development of women. Training and skill development for self employment and loans and subsidy for self employment are some examples. Employment opportunities are created through women self help groups. The nutritious food in anganwadis and mid day meal in schools is given through women self help groups. Names of both husband and wife are written in the pattas given by the government. The name of the woman of the household is written as head of the household in ration cards.
  4. Political Empowerment 50% reservation has been done for seats in Panchayats and urban local bodies. 33% reservation is also done in government services.

Constitutional Provisions for Women Empowerment

  1. Article 14 – Equality before law.
  2. Article 15 (1) – State shall not discriminate on the basis of gender.
  3. Article15 (3) – State can make special provisions for the welfare of women.
  4. Article 16 (2) – No discrimination shall be done on gourds of gender in services under the State.
  5. Article 23 (1) – Ban on Human trafficking and bonded labour.
  6. Article (A) – State shall ensure equal rights of livelihood for men and women.
  7. Article 39 (e) State shall ensure equal pay for equal work for men and women.
  8. Article 42 – State shall make provisions for maternity benefits and human conditions of work.
  9. Article 51-A (e) – It shall be the duty of every citizen to to renounce practices derogatory to the dignity of women.
  10. Article 243- D (3) – One third seats in Panchayats shall be reserved for women.
  11. Article 243-D (4) – One third posts of chair persons of Panchayats at all levels shall be reserved for women.
  12. Article 243-T (3) – One third posts to be filled by direct elections in municipalities shall be reserved for women.
  13. Article 243-T (4) – The State legislatures shall be empowered to make law for reservation of posts of chairpersons of municipalities.

Other legal provisions for protection of women

  1. Maternity Benefit Act, 1961
    1. No women will be made to work by any employer for six weeks after labour or abortion.
    2. It is the right of women and duty of employers to give average daily wage to women for 6 weeks starting from the day of labour.
    3. The employer can be punished with imprisonment or fine or both for contravention of the provisions of the Act.
    4. Recent amendments in the Act –
      1. The period of maternity benefit has been increased from 12 weeks to 26 weeks till two children and 12 weeks for more than 2 children.
      2. Maternity benefit both for commissioning mother and adopting mother.
      3. Facility of work from home.
      4. Compulsory provision of crèche for institutions with more than 50 employees.
  2. Immoral Traffic (Prevention) Act 1956
  3. Medical Termination of Pregnancy Act, 1971 (MTP Act)
  4. Legal Provisions with respect to female feticide -
    1. Pre-conception and pre-natal diagnostic techniques (prohibition of sex selection) Act 1994 (PCPNDT Act) – Under this Act, registration of sex determination laboratories and ultrasound machines has been made mandatory. Following are banned under the Act -
      1. Advertisement for providing services of sex selection or sex determination;
      2. Non-registration of clinics of pre-conception or pre-natal examination techniques and non display of certificate of registration at prominent place in the clinic;
      3. Sex determination of unborn child;
      4. Compelling a pregnant woman for sex determination;
      5. Assisting in or providing services of sex determination;
      6. Giving information the sex of unborn child by doctor to the pregnant woman or other person;
      7. Non maintenance of records under PCPNDT Act by registered clinics.
    2. Indian Penal Code
      1. Section 312 – Whoever voluntarily causes a woman with child to miscarry, shall, if such miscarriage be not caused in good faith for the purpose of saving the life of the woman, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both, and, if the woman be quick with child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
      2. Section 313 - whoever commits the offence defined in the last preceding section without the consent of the woman, whether the woman is quick with child or not, shall be punished with 1[ imprisonment for life] or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
      3. Section 314 - whoever, with intent to cause the miscarriage of woman with child, does any act which causes the death of such woman, shall be punished with imprisonment of either description for a term may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
      4. Section 315 - Whoever before the birth of any child does any act with the intention of thereby preventing that child from being born alive or causing it to die after its birth, and does by such prevent that child from being born alive, or causes it to die after its birth, shall, if such act be not caused in good faith for the purpose of saving the life of the mother, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, or with fine, or with both.
      5. Section 316 - whoever does any act under such circumstances, that if he thereby caused death he would be guilty of culpable homicide, and does by such act cause the death of a quick unborn child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
      6. Section 317 - Whoever being the father or mother of a child under the age of twelve years, having the care of such child, shall expose or leave such child in any place with the intention of wholly abandoning such child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years; or with fine, or with both.
      7. Section 318 - whoever, by secretly burying or otherwise disposing of the death body of a child whether such child die before or during its birth, intentionally conceals or endeavours to conceal the birth of such child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
  5. Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redress) Act 2013 This Act is applicable in institutions where there are more than 10 employees. This Act contains all the guidelines of in the Vishakha judgment e.g. powers of civil court to compliant committees for obtaining evidence. If the employer does not implement the provisions of the Act there is a fine of Rs 50,000. This Act also covers persons working in unorganized sector, daily wage earners, domestic servants etc. There are some shortcoming in the Act as well e.g. sexual harassment has not been criminalized in the Act and a criminal complaint is registered only if the sufferer wishes to register a criminal complaint. This may result in pressure on the sufferer by the male boss to withdraw her complaint.
  6. Dowry Prohibition Act, 1961.
  7. Indecent Representation of Women (Prohibition) Act (1986)
  8. Equal Remuneration Act (1976)
  9. Muslim dissolution of marriage Act, 1939 This give the right of dissolution of marriage to Muslim women.
  10. Muslim Women (Protection of Rights on Divorce) Act (1986)
  11. Indian Christian Marriage Act (1872)
  12. Hindu Marriage Act Equal rights of husband and wife for divorce. Prohibition of polygamy. In the event of divorce, maintenance allowance to the wife according to the status of the husband. Rights of the wife in the self earned property of the husband, etc.
  13. Hindu succession Act – Right of daughter in the property of father.
  14. Family Courts Act, 1984 – For speedy resolutions of family disputes.
  15. Some special Provisions in Indian Penal Code -
    1. Rape – The rule of non disclosure of name of the victim, hearing of the case by a woman judge, recording of the statement of victim by woman police officer and in the presence of her relatives. The completion of hearing within 2 months. Provision of death penalty in certain cases of rape.
    2. Dowry death
    3. Cruelty and harassment
  16. Code of Criminal Procedure - No arrest of women in night. Section 125 – maintenance to wife by husband.
  17. Free legal aid
  18. Minimum wages Act, 1948 - Equal remuneration for men and women.
  19. Other Acts-
    1. Mines Act, 1952 – Prohibition of employment of women in mines and factories between 7 PM and 6 AM.
    2. Bonded labor abolition Act, 1976.
    3. Indian Divorce Act, 1869.
    4. Indian Evidence Act, 1872.
    5. Hindu Adoptions and Maintenance Act 1956.

National Commission for Women

National Commission for Women was established under the National Commission for Women, Act, 1990 (20 of 1990) in January 1992 for the following objectives:

  1. Monitoring and evaluation of constitutional and legal protection to women;
  2. Make recommendations for better legal measures;
  3. Provide facilities for inquiry into complaints and
  4. Advising the Government on all policy matters affecting women.

First women’s commission was established on 31st January 1992 with Smt. Jayanti Patnaik as Chairperson. Second commission was established in July 1992 with Dr. (Smt.) Mohini Giri as Chairperson. Third commission was established in January 1999 with Smt. Vibha Parthsarthi as chairperson. Fourth commission was established in January 2002 with Dr Purnima Advani as chairperson and the fifth commission was established in February 2005 with Dr. Girija Vyas as chairperson.

The Work of National Commission of women so far –

  1. Made gender profile for empowerment of women.
  2. Received complaints in large number and worked for their quick disposal.
  3. Raised the issue of child marriages.
  4. Organized legal awareness programmes.
  5. Reviewed laws such as Dowry Prohibition Act 1990, PNDT Act 1994, IPC 1860 and National Commission for women Act 1990 for making them more effective.
  6. Organized workshops and seminars for gender equity, female feticide, violence against women and started people’s campaings against such social evils.

Chhattisgarh State Women’s Commission

State Women’s Commission was established in Chhattisgarh under Section 3 of Chhattisgarh State Women’s Commission Act 1995 for empowerment of women, removal of discrimination against them and protection of women from exploitation and offences.

As per the provisions of the Act there shall be one Chairperson and 6 members. In addition there shall be one Government Officer who shall be the secretary of the Commission. The tenure of the chairperson and members shall be for 3 years. At present Smt. Harshita Pandey is the chairperson and Khileshwari Kiran is member.

The main responsibilities and functions of the Chhattisgarh State Women’s Commission are -

  1. Investigation and inquiry into cases of protection given to women under Constitutional and other legal provisions.
  2. To take the cases of protection of women to appropriate authorities.
  3. To give report to the Government on implementation of measures of protection of women.
  4. To prepare plans for social and economic development of women.
  5. To give financial assistance in such court cases of women which have an impact on large groups of women.
  6. Make a detailed study of the economic, educational and health status of women.
  7. Make recommendations to the Government for improvement in the conditions of work places for women, women lock ups, women homes, etc.
  8. To collect information about cases of offence against women such as dowry, rape, kidnapping, molestation, immoral trafficking, medical negligence during labor and sterilization operations etc.
  9. Receive Complaints about:-
    1. Offence against women.
    2. Not giving minimum wage, basic health facilities, labor facilities etc.
    3. Non compliance of policy decisions of the Government regarding women
    4. Rehabilitation of abandoned and destitute women
  10. Giving information to women about their rights by workshops, seminars, camps etc.
  11. To take cognizance of harassment of women published in the media.

Women Empowerment Schemes in Chhattisgarh

  1. Integrated Child Development Services (ICDS) The scheme was started in 1975. Currently Government of India bears 90% expenditure on the scheme and the remaining 10% is borne by the State Government. The scheme is implemented through Anganbadis. Following services are given under this scheme –
    1. Immunization
    2. Supplementary nutrition
    3. Health checkup
    4. Referral services
    5. Pre-school education(Non-Formal)
    6. Nutrition and Health information
  2. Rajiv Gandhi Adolescent girl empowerment scheme (SABALA) It was started on 19th November 2010 on the birthday of Smt. Indira Gandhi. Girls in the age group of 11 to 18 years are empowered by giving following services: Nutrition, Iron and Folic Acid supplement, Health check up, referral, nutrition and health education, family welfare consultation, home management. Girls aged 16 years and above are given vocational training under National skill development Mission.
  3. Sukhad sahara SchemeWidows in the age group of 18-39 and abandoned women of 18 years and above below poverty line are given a pension of Rs 350 per month under this scheme. The authority to sanction is with Janpad Panchayats.
  4. Mahtari Jatan Scheme It was started on 3rd May 2016 from village Salagwakala in Koria district. In this scheme hot cooked meal is given to pregnant women in anganwadis 6 days a week.
  5. Chief Minister Rajshree scheme 50000 rupees are given on the birth of girl child. The money is credited into the bank account of the mother. 2500 rupees are given at the time of birth, 2500 on the first birthday, 4000 on taking admission in class one, 5000 on taking admission in class sixth, 11000 on taking admission in class 10th and 25000 on passing class 12th.
  6. Mahtari Express Scheme The scheme of free transporting children and pregnant women to hospital.
  7. Suchita scheme Under this scheme free sanitary napkins are distributed to girls in Government schools.
  8. Sangwari Scheme In this scheme women are training in household work, house cleaning, use of washing machine, vacuum cleaner etc. Police verification is also done and a telephone number is given so that people can call on this number and the trained women are provided as house maids.
  9. Chief Minister Shishu Shakti and Mahtari Shakti Ahar In this scheme the work of manufacturing ready to eat food has been given to women self help groups.
  10. Ayushmati Scheme Poor women are given Rs 400 for admission in hospitals for a week and Rs 1000 for admission for more than a week.
  11. Chief Minister Kanyadan Scheme This is for the marriage assistance for marriage of girls of poor families. Total of Rs 15000 is given out of which goods worth Rs 11500 and Rs 3500 is given cash. This is for marriage of a maximum of two girls of more than 18 years in each family.
  12. Sakhi One stop centre This is for control of offences against women. It was started in 2015. Services relating to health, legal aid, psychiatric consultation, etc. are available. Toll free help line number is also there. There are 5 beds for stay of needy women for up to 5 days after which they can be sent to Nari Niketan, hospitals etc.
  13. Beti Bachao - Beti Padhao scheme This Government of India scheme was started in 2015 to end discrimination against girl child. Many innovative schemes have been started in Chhattisgarh under this programme –
    1. Chhattisgarh Noni Suraksha Scheme In this scheme for girls born after 1st April 2014 in BPL families, Rs 5000 is given at the time of birth, and thereafter Rs 5000 every year for 5 years so that a total of Rs 25000 is given as premium. On attaining the age of 18 years if unmarried or on passing class 12th the girl gets Rs One lakh on maturity of the policy.
    2. Sukanya Samriddhi Scheme Started on 22nd January 2015. In this scheme a minimum of Rs 1000 can be deposited in any bank or post office on the birth of a girl child. Money is to be deposited for 14 years and a maximum of Rs 1.50 lakh can be deposited. The girl gets the money on maturity of the account when she attains the age of 21 years. The account carries an interest of 8 to 9%.
    3. Chief Minister Amrit Scheme Children in the age group of 3 to 6 years are given 100 ml of sweetened milk on every Monday in anganwadis from April 2016.
    4. Prime Minister Matri Vandan Scheme This is under the National Food Security Act, 2013 and is in force in the entire country from 1st January 2017.A cash assistance of Rs 5000 is given to pregnant women and women who have recently delivered. Al women except those in Government Service are eligible.
  14. Ujjwala scheme Implemented from 13th August 2016. Families under BPL as per SECC are given free cooking gas connection on a token payment of Rs 200 only. So far 22 lakh connections have been given in Chhattisgarh.
  15. Chhattisgarh Women Fund (Mahila Kosh)
    1. Loans are given on easy terms to women self help groups. This was started from 2003. Women self help groups are given a loan of upto 10 times their savings or a maximum of Rs 50000 at 3% interest rate. On full repayment they beocme eligible for a loan of upto 2 lakh rupees.
    2. Saksham Scheme – It was started in 2009-10. Mahila Kosh gives loan of up to 1 lakh rupees to widows of 35 to 45 years and abandoned women.
    3. Swablamban Scheme – Started in 2009-10. This is for training of women for self-employment.

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