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हर एक चेहरा डरा रहा है

यूं हसरतों को ज़ुबाँ ना देना, ज़ुबाँ मिली तो फ़िसल जाएगी,
जो हमकदम बन साथ चल तो, तेरी ये हस्ती बदल जाएगी.

मगरूर दिल से ना कैफ़ियत दे, नहीं ये तेरी असलियत है,
रुखसारे परत जो उतार गई, तो सारी हक़ीकत बदल जाएगी.

यह ख्वाहिशें और यह जुस्तजू सब, फरेबी जुमलों से तर-बतर हैं
हवा की दस्तक के व्लवले से सारी बसाहट उजड़ जाएगी.

यकीन टूटा तेरी वफ़ा का, तेरी इस बज़्जते-ए- ज़ुबाँ का
है इंतज़ारी में दिन गुज़रते, फिजाँ मुल्क की बदल जाएगी.

चिराग जिनको किया था रौशन, वही ये महफ़िल जला रहे हैं
आतिशे-वहशत जो गर यूं फैली, तेरा भी घर ये निगल जाएगी.

ना दोस्ती का सिला ‘अणिमा’ ना रिश्तों की महक बची है,
हर एक चेहरा डरा रहा है, कब किसकी सीरत बदल जाएगी.

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