प्रकाश

इस अध्याय में अंधेरे से तुलना करके प्रकाश के बारे में बताया गया है। हम बच्चों को बता सकते हैं कि अंधेरा प्रकाश की अनुपस्थिति के कारण होता है। हमारी आंखें प्रकाश संवेदी होती हैं,अर्थात् प्रकाश को पहचान लेतीं हैं । इसीलिये प्रकाश होने पर हम देख पाते हैं। प्रकाश के स्रोतों के बारे में बताकर हम बच्चों से प्राकृतिक (सूर्य, जुगनू आदि) और मानव निर्मित (बल्ब, मोमबत्ती आदि) प्रकाश स्रोतों की बात कर सकते हैं।

प्रकाश सीधी रेखा में चलता है यह दिखाने के लिये एक सरल गतिविधि की जा सकती है। काले कागज़ के तीन कार्ड लें। उन्हें एक दूसरे पर रखकर एक बराबर काट लें। अब एक सुई से इनमें एक छेद इस प्रकार बनायें कि सभी कार्डों के छेद एक दूसरे के ठीक सामने हों। अब इन कार्डों को प्लास्टिसिन या मोल्डिंग क्ले की सहायता से एक मेज पर खड़ा कर दें। एक ओर एक टार्च या मोमबत्ती‍ रखें और उसे दूसरी ओर से तीसरे कार्ड के छेद से देखें। यदि आप किसी भी कार्ड को अपनी जगह से थाेड़ा सा भी हिला देंगे तो आपको टार्च या मोमबत्ती दिखना बंद हो जायेगी। इससे सिध्द होता है कि प्रकाश सीधी रेखा में ही चलता है।

छाया जब प्रकाश के रास्ते में कोई अपारदर्शी वस्तु आ जाती है तो प्रकाश उसमें से होकर नहीं जा सकता और क्योंकि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है इसलिये अपारदर्शी वस्तु के पीछे प्रकाश नहीं जा सकता। इस कारण से किसी प्रकाश स्रोत के सामने अपारदर्शी वस्तु रखने से उस वस्तु के पीछे अंधकार हो जाता है। इसे ही हम उस वस्तु की छाया कहते हैं। आप चाहें तो बच्चों को अपने हाथ की छाया से तरह-तरह के जानवरों की आकृतियां बनाकर दिखा सकते हैं।

प्रच्छाया और उपछाया जब प्रकाश का स्रोत एक बिंदु के रूप में होता है, तो अपारदर्शी वस्तु उससे निकलने वाले पूरे प्रकाश को रोक लेती है, इस कारण वस्तु के पीछे जहां तक उसकी उसकी छाया होती है वहां पूरा अंधकार होता है। इसे पूर्ण छाया या प्रच्छाया (अंब्रा) कहते हैं।

परंतु यदि प्रकाश का स्रोत बड़ा हो तो उसके सामने रखी अपारदर्शी वस्तु कुछ दूरी तक को पूरा प्रकाश रोकती है, परंतु कुछ और दूरी पर प्रकाश स्रोत के किनारे से आने वाले प्रकाश को पूरी तरह नहीं रोक पाती। इस स्थान पर कुछ धुंधला सा प्रकाश आता रहता है, और यहां पर पूर्ण अंधकार नहीं होता। इसे उपछाया (पेनंब्रा) कहते हैं।

हम चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण को भी इसी प्रकार समझ सकते हैं।

चंद्रग्रहणधरती जब सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो धरती की छाया चंद्रमा की ओर पड़ती है। जब चंद्रमा धरती की उपछाया वाले हिस्से में होता है तो आंशिक चंद्रग्रहण और जब प्रच्छाया वाले हिस्से में होता है तो पूर्ण चंद्रग्रहण होता है –

सूर्यग्रहणचंद्रमा जब सूर्य और धरती के बीच आ जाता है तो चंद्रमा की छाया धरती की ओर पड़ती है। अक्सर चंद्रमा की केवल उपछाया की धरती तक पहुंच पाती है। ऐसी स्थिति में सूर्य हमें कुछ धुंधला दिखता है, परंतु सूर्य पूरी तरह से ओझल नहीं होता। धरती के जिस हिस्से पर चंद्रमा की प्रच्छाया पड़ती है, वहां से देखने पर सूर्य पूरी तरह से ओझल हो जाता है। सूर्यग्रहण के कुछ मजेदार चित्र देखिये –



पिनहोल कैमरा यदि प्रकाश किसी बहुत बारीक छेद से गुजरे तो यह छेद एक लैंस की भांति व्यवहार करता है। इसी से पिनहोल कैमरा बनाया जाता है। पिनहोल कैमरा बनाने की बहुत आसान विधि श्री अरविंद गुप्ता ने नीचे दिये वीडियो में समझाई है –

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