चंद्रमा तथा सौर मंंडल के ग्रह


हमारा उपग्रह चंद्रमा – पाठ्य पुस्तक में बताया गया है कि ग्रहों के चारों ओर घूमने वाले आकाशीय पिंडों को उपग्रह कहते हैं। हमारी पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा है जिसे हम हर रोज को आकाश में देख सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बहुत से उपग्रह बनाकर अंतरिक्ष में भेजे हैं जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। इन्हें क्रत्रिम उपग्रह कहा जा सकता है। भारत के वैज्ञानिकों ने भी बहुत से उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं। भारत के पहले उपग्रह का नाम भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि के नाम पर आर्यभट्ट रखा गया था।


चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता  है। इसे चंद्रमा की कलाओं से सिध्द किया जा सकता है। क्योंंकि चंद्रमा में अपना कोई प्रकाश नहीं है और वह सूर्य का प्रकाश परावर्तित करने के कारण ही दिखाई देता है, इसलिये जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच होता है तब उसके धरती की ओर वाले भाग पर सूर्य की किरणे नहीं पड़तीं अत: उस रात को अमावस्या होती है और चंद्रमा हमें दिखाई नहीं देता है। इसके बाद जब चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी  का चक्‍कर लगाते हुए आगे बढ़ता है तो उसका कुछ भाग सूर्य की रोशनी से प्रकाशित होने के कारण दिखाई देने लगता है। प्रतिदिन यह प्रकाशित भाग बढ़ता जाता है, और पूर्णिमा की रात चंद्रमा का सूर्य से प्रकााशित पूरा गोला हमे दिखाई देता है। इसके बाद फिर से सूर्य से प्रकाशित भाग का दिखाई देना कम होने लगता है। इसे ही चंद्रमा की कलाएं कहते हैं। इसे नीचे चित्र की सहायता से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।


    


क्या चंद्रमा अपनी धुरी पर भी घूमता है

ध्यान से देखों तो पता चलेगा कि हमे चंद्रमा का एक ही हिस्सा प्रत्येक रात को दिखाई देता है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि चंद्रमा अपनी धुरी पर नहीं घूमता। परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। वास्तविकता यह है कि पृथ्वी की गुरुत्वाप‍कर्षण शक्ति इतनी अधिक है कि चंद्रमा पृथ्वी के साथ बंध गया है। इसे Tidal Locking of Moon कहते हैं। परिणामस्वनरूप चंद्रमा अपनी धुरी पर उतने ही समय में घूमता है जितने समय में वह पृथ्वी का चक्कर लगाता है।


सौर मंडल के अन्य ग्रह – सौर मंडल की बात समाप्त करने के पहले सौर मंडल के अन्य ग्रहों के बारे में कुछ बातें कहना उचित है। हम 5 ग्रहों को बिना दुरबीन के देख सकते हैं, यद्यपि इन्हें देखने के लिये हमें आकाश का कुछ ज्ञान होना आवश्यक है। बुध (Mercury) और शुक्र (Venus) पृथ्वीि की तुलना में सूर्य के निकट हैं, इसलिये इन्हें शाम को सूर्य डूबने के तत्काल बाद और सुबह सूर्य उगने के ठीक पहले देखा जा सकता है। जब यह ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हुए उसके पास आ जाते हैं, या फिर उसके पीछे चले जाते हैं, जब इन्हें  देखना संभव नहीं होता। इसे इन ग्रहों का अस्त होना कहते हैं। यह दोनो ग्रह क्षितिज के पास दिखाई देते हैं। शुक्र जब दिखाई देता है उस समय वह सबसे ज्यादा चमकदार तारे के रूप में दिखता है। क्योंकि सूर्य की परिक्रमा करते हुए यह ग्रह कभी-कभी सूर्य एवं पृथ्वी के बीच आ जाते हैं इसलिये ऐसे समय पर इन्हें  एक काले बिन्दुे के रूप में सूर्य के पार जाते हुए देखा जा सकता है। इसे Transit of Mercury और Transit of Venus कहा जाता है। दुरबीन से देखने पर इन दोनो ग्रहों में चंद्रमा की तरह कलाएं भी देखी जा सकती हैं। मंगल (Mars), ब्रहस्पति (Jupiter) और शनि (Saturn) ग्रह पृथ्वी की तुलना में सूर्य से अधिक दूरी पर हैं, इसलिये यह लगभग पूरे वर्ष भर दिखाई देते हैं। पृथ्वीे से दूरी अधिक होने के कारण यह थोड़े कम चमकदार हैं और इसलिये इन्हें देखना कुछ कठिन है। हम चाहें तो बच्चों को सौर मंडल के बारे में अच्छी तरह से समझाने के लिये रात के समय विशेष कक्षा लगाकर उन्हें ग्रह दिखा सकते हैं। ऐसी विशेष कक्षा में बच्चों को तारे और राशियां आदि भी पहचानना सिखाया जा सकता है।

Visitor No. : 691141
Site Developed and Hosted by Alok Shukla