कहानी पूरी करो

पिछले अंक में हमने आपको यह अधूरी कहानी पूरी करने के लिए दी थी –

मालपुए

लेखक - गुलजार बांधे

एक बार की बात है एक गांव में एक बूढ़ा आदमी रहता था. एक दिन वह जंगल में लकडी काटने गया. लकड़ी काटने के बाद वह घर चलने लगा. चलते-चलते वह बहुत थक गया. तभी उसे एक आदमी मिला. बूढ़े ने उस आदमी से कहा – बेटा तुम इस लकड़ी के गट्ठर को घर पहुंचा दो तो तुम्हे. एक चीज़ दूंगा.

उस आदमी ने लकड़ी का गट्ठर बूढ़े के घर पहुंचा दिया. बूढ़े बाबा ने उस आदमी को मालपुए दिए. फिर बूढ़े ने उस आदमी को बताया कि झाड़ी के पीछे एक गुफा है जिसमें तीन बौने रहते हैं. उसने कहा कि उन बौनो को मालपुए बहुत पसंद है. बूढ़े ने कहा कि मालपुए उन बौनों को दे देना. वे तुम्हेप एक चक्कीप देंगे जिससे तुम अमीर बन जाओगे.

इस कहानी को पूरा करके बहुत से पाठकों ने भेजा है. कुछ को हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं –

कन्हैया साहू (कान्हा) व्दारा पूरी की गई कहानी

बूढ़ा आदमी चक्की लेकर अपने गांव गया और दूसरे दिन जो घर मे थोड़ा सा अनाज था उसे चक्की में पीसने लगा. वह देखता है कि थोड़े से अनाज को पीसने पर बहुत सारा आटा चक्की से निकलने लगा. इस प्रकार से उस बूढ़े को अब खाने की कमी नही रही और वह गांव के दूसरे गरीब व भूखे लोगो को भी खाना देने लगा. जब गांव के लोगो को जादुई चक्की के बारे में पता चला तो गांव वाले भी उस बूढ़े के पास आकर अपना अनाज पिसाई कराने लगे और उसके बदले में बूढ़े को कुछ दाम दे देते. इस तरह से गांव वालों की गरीबी व भुखमरी धीरे-धीरे दूर हो गयी. जादुई चक्की की बात दूर दूर तक फैल गयी. लोग अपना अनाज लाते और बूढ़े की चक्की से पिसाई कराकर बहुत सारा आटा लेकर जाते. बदले में उस बूढ़े को कुछ पैसे व अन्य जरूरी सामान देकर जाते. देखते ही देखते एक वर्ष के भीतर उस बूढ़े की गरीबी पूरी तरह से दूर हो गयी. वह अब भी खुशी-खुशी लोगो का अनाज पीसता और बदले में उसे कुछ न कुछ मिलता. इस प्रकार उस जादुई चक्की के कारण आसपास के बहुत सारे गावो के लोगो की भुखमरी व गरीबी दोनो दूर हो गयी और बूढ़े आदमी के साथ साथ सभी लोग सुख पूर्वक जीवन यापन करने लगे.

सीख:- सच्चे मन व लगन से किये जा रहे हर कार्य मे देर से ही सही सफलता जरूर मिलती है.

रवि कुमार टेकाम व्दारा पूरी की गई कहानी

उसके बाद वह आदमी उस गुफा के अंदर जाता है. वह आदमी उन बौनों को मालपुए दे देता है. मालपुए के बदले में बौनों ने उस आदमी को एक चक्की दी. एक बौना बोला यह चक्की ऐसी वैसी चक्की नहीं है, यह चक्की जादुई चक्की है. इस चक्की से जो भी चीज मांगोगे मिल जाएगी. उसके बाद उस चक्की को लाल कपड़े से ढ़ंक देना.

वह आदमी उस चक्की को लेकर खुशी खुशी घर लौट जाता है. घर पहुंच कर वह आदमी चक्की को जमीन पर रख कर बोला चक्की चक्की चावल निकाल. चावल निकालने के बाद वह आदमी उस चक्की को लाल कपड़े से ढ़ंक देता है. फिर कहता है चक्की चक्की दाल निकाल. उसके बाद उस चक्की को लाल कपड़े से ढ़ंक देता है. उसके बाद उस दाल चावल को पकाकर अपने बीवी बच्चों को खिलाता है. धीरे धीरे वह अमीर हो जाता है.

उसका एक सौतेला भाई भी था. वह बहुत धूर्त था. एक दिन उसके सौतेले भाई को पता चल गया कि उसके पास एक जादुई चक्की है. उसने चक्की को चुराने की योजना बनाई और एक रात चक्की को चुरा ले गया. वह अपनी बीवी बच्चों के साथ समुद्र की ओर चल पड़ा. समुद्र किनारे चलते चलते उसे एक नाव मिली. उस नाव पर बैठकर समुद्र के बहुत दूर जाने के बाद उसे चक्की को चलाने का लालच आया. वह उस चक्की से बोला चक्की चक्की नमक निकाल. उसके बाद चक्की ने नमक निकालना शुरू किया. उसको चक्की को रोकने का तरीका पता नहीं था. चक्की नमक निकलता ही रहा और वह तीनों नाव और चक्की के साथ डूब गए.

शिक्षा - लालच बुरी बला है.

विश्वविजय मरकाम व्दारा पूरी गई कहानी

और वह आदमी ने चक्की को लेकर अपने घर आ गया. फिर उसने उस चक्की से कहा चक्की चक्की चावल निकाल और उसके बाद उस चक्की में से बहुत सारा चावल निकला. फिर से आदमी ने कहा- चक्की चक्की मिर्ची निकाल, तब ढेर सारी मिर्ची निकलने लगी. उसके बाद उसने उस चक्की को लाल कपड़े से ढ़ंक दिया जिससे चक्की बंद हो गई. फिर वह सारा सामान भरकर मंडी ले गया. उसे बेचने पर ढ़ेर सारे रुपए मिले, जिससे वहां अमीर बन गया. यह देख कर उसका भाई सोचने लगा कि वह पहले तो बहुत गरीब था, अब वह दिनोंदिन अमीर कैसे हो रहा है? तभी उसे पता चला कि यह सब चक्की के कारण हो रहा है.

एक रात को उसने उस चक्की को चुरा लिया. उस चक्की को लेकर अपनी पत्नी और अपने बेटे के साथ समुद्र की ओर भाग गया और वह समुद्र को पार करने लगा. उसकी पत्नी ने कहा यह क्या है? पति ने कहा यह जादू की चक्की है. इसमें जो मांगो मिल जाएगा. उसके पति ने उसमें से सोना निकालने को कहा. चक्की चक्की सोना निकाल. और उस चक्की से सोना निकालना शुरू हो गया. उसे चक्कीन बंद करना नहीं आता था. नाव पर ढ़ेर सारा सोना हो जाने वजन बढ़ने लगा और सभी समुद्र में डूब गए.

शिक्षा - अधूरा ज्ञान नुकसानदायक है.

अगले अंक के लिये पुष्पा शुक्ला जी ने हमें एक अधूरी कहानी भेजी है –

अधूरी कहानी - आकाश का फ्रिज

लेखिका – पुष्पा शुक्ला

कल रात बादलों से बर्फ गिरने लगी. बड़ी - बड़ी, गोल - गोल, तड़- तड़ , तड़ – तड़. टॉमी बाहर सोया था, बेचारे के सर पर एक जमकर पड़ी. कूँ- कूँ करता अंदर आया. मुझे तो बड़ा मजा आ रहा था. मैंने तो चुपके से दो - चार खाई भी. ठंडी- ठंडी, सफेद -सफेद रसगुल्ले जैसी. मुझे देख टॉमी भी खाने लगा. वह जैसे ही खाने को करता वे घुल जातीं. पर मुझे एक बात समझ नहीं आई की बादलों में बर्फ़ जमी कैसे? क्या उनके पास बहुत बड़ी - सी फ्रिज है?

इस मज़ेदार कहानी को पूरा करके हमें dr.alokshukla@gmail.com पर भेज दीजिये. अच्छी कहानियां हम अगले अंक में प्रकाशित करेंगे.

Visitor No. : 1186146
Site Developed and Hosted by Alok Shukla