कहानी पूरी करो

पिछले अंक में हमने आपको यह अधूरी कहानी पूरी करने के लिए दी थी -

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में 2 बिल्लियां रहती थीं. दोनों बहुत ही अच्छी दोस्त थीं और दोनों आपस में बहुत प्यार से रहती थीं. दोनों की दोस्ती का सभी लोग उदाहरण देते थे. वो दोनों बहुत ख़ुश थीं. उन्हें जो कुछ भी मिलता था, उसे आपस में मिल-बांटकर खाया करती थीं.

एक दिन दोनों दोपहर के व़क्त खेल रही थीं कि खेलते-खेलते दानों को ज़ोर की भूख लगी. वो भोजन की तलाश में निकल पड़ीं. कुछ दूर जाने पर एक बिल्ली को एक स्वादिष्ट रोटी नज़र आई. उसने झट से उस रोटी को उठा लिया और जैसे ही उसे खाने लगी, तो दूसरी बिल्ली ने कहा, “अरे, यह क्या ? तुम अकेले ही रोटी खाने लगीं ? मुझे भूल गई क्या ? मैं तुम्हारी दोस्त हूं और हम जो भी खाते हैं आपस में बांटकर ही खाते हैं.

पहली बिल्ली ने रोटी के दो टुकड़े किए और दूसरी बिल्ली की ओर एक टुकड़ा बढ़ा दिया. यह देख दूसरी बिल्ली फिर बोली, “यह क्या, तुमने मुझे छोटा टुकड़ा दिया. यह तो ग़लत है.

इस कहानी को बहुत से लोगों ने पूरा करके भेजा है. उसमें से कुछ हम नीचे दे रहे हैं.

कु. मधु सुमन हिमांचल व्दारा पूरी की गई कहानी

उन्होंने बंदर को सारी बात बताई और उससे फैसला करने को कहा. बंदर सारी बात सुनकर एक तराजू लेकर आया और उसने दोनों टुकड़े एक एक पलड़े में रख दिये. तौलते समय जो पलड़ा भारी हुआ, उस तरफ की रोटी का एक टुकड़ा तोड़ के अपने मुंह में डाल लिया. अब दूसरी तरफ का पलड़ा भारी हो गया. तब बंदर ने उस तरफ की रोटी का टुकाड़ा तोड़ कर अपने मुंह में डाल लिया. इस तरह बंदर कभी इधर से तो कभी उधर से ज्यादा होने की बात कहकर रोटी तोड़-तोड़ कर अपने मुंह में डालता गया. दोनों बिल्लियां चुपचाप बंदर के फैसले का इंतजार करती रहीं. जब बिल्लियों ने देखा कि रोटी का टुकड़ा तो बहुत छोटा रह गया, तब बिल्लियां बोली आप चिंता ना करें, हम अपना बंटवारा स्वयं कर लेंगे. इस पर बंदर बोला- ‘आप जैसा ठीक समझो, परंतु मुझे अपनी मेहनत की मजदूरी मिलनी चाहिए.’ इतना कहकर बंदर ने बाकी बचे हुए रोटी के दोनो टुकड़े अपने मुंह में रख लिये और वहां से भाग गया. दोनों बिल्लियों को अब अपनी गलती समझ में आई कि आपस में झगड़ना बहुत बुरी होती है, और दूसरे इसका फायदा उठा सकते हैं. इसलिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए और हमें कभी भी लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहिए.

धारिणी सोनी व्दारा पूरी की गई कहानी

तभी वहां एक बंदर आया. वह सभी जानवरों में सबसे बुध्दिमान था. बंदर दोनो बिल्लियों की दोस्ती के बारे में जानता था. उसे यकीन नही हुआ कि दोनो एक रोटी के लिए झगड़ रहे हैं. उसने दोनो को शान्त कराया और रोटी का टुकड़ा सामने रख दिया. सारे जानवरो के सामने उसने इस झगड़े का कारण पूछा. पहली बिल्ली बोली – ‘यह रोटी मुझे मिली थी. मैने जब इसे आधा दिया तो यह एहसान मानने के बदले मुझसे लड़ने लगी.’ दूसरी बिल्ली बोली – ‘हम दोनो हमेशा बराबर बांट कर खाते हैं पर आज यह खुद को बड़ा और मुझे छोटा टुकड़ा दे रही थी इसलिये मैने बराबर करने को कहा तो यह लड़ाई करने लगी. इससे कहि‍ए कि दोनो टुकड़े बराबर करे.’

पहली बिल्ली ज़ि‍द पर अड़ी रही और नही मानी. दोनो के झगड़े को सुलझते नही देख कर बंदर को एक उपाय सूझा. उसने रोटी का एक छोटा टुकड़ा उठाया और मुंह में डालने लगा. अपने दोस्त की रोटी बंदर को खाते देखकर दूसरी बिल्ली ज़ोर से बोली – ‘रुकिए बंदर महोदय. मुझे रोटी नही चाहिए. आप यह पूरी रोटी मेरी दोस्त को दे दीजिए.’ यह सुनकर सारे जानवर, बंदर और पहली बिल्ली सब उसकी तरफ आश्चर्य से देखने लगे. किसी को समझ में नहीं आया कि कुछ देर पहले जो रोटी के लिए लड़ रही थी वह अपनी दोस्त को रोटी देने के लिए कैसे मान गई.

पहली बिल्ली रोटी लेकर उसके पास आई और पूछने लगी कि मित्र तुमने ऐसा क्यों कहा. दूसरी बिल्ली बोली – ‘भले ही तुम मुझे यह रोटी न दो पर तुम्हारे हक की रोटी कोई और खाए यह मैं नहीं होने दूंगी.’ यह सुनकर पहली बिल्ली शर्मिंदा हो गई. रोटी के छोटे टुकड़े के लिये वह अपनी अच्छी दोस्त से झगड़ा कर बैठी थी. उसने अपनी दोस्त से माफी मांगी और रोटी के दो बराबर टुकड़े करके एक टुकड़ा अपनी दोस्त को दे दिया.

तभी बंदर उनके पास आया और बोला – ‘तुम दोनो के झगड़े को शांत करने और अपनी गल्ती का अहसास कराने के लिये ही मैंने यह तरीका निकाला था. कभी भी अपनी दोस्ती के बीच ऐसे छोटे-मोटे झगड़े को हावी मत होने देना और मिलकर रहना. फिर क्या था दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया और सब जानवर खुशी से दोनो बिल्लियों को घेर कर नाचने लगे.

श्रीमती भावना सिंह व्दारा पूरी की गई कहानी

बंदर बिल्लि‍यों को समझाने लगा लेकिन दोनों नहीं मानी. बंदर खुद रोटी खाना चाहता था. बंदर के मन मे क्या चल रहा है यह बात बिल्लियां समझ गईं. उन्होाने सोचा कि बंदर भी हमारा दोस्त है. हमेशा उसने हमारी मदद की है. इसलिए उन्होंने आपस मे बात की और लड़ना छोड़ दिया. रोटी के तीन टुकड़े करके एक बंदर को भी दिया. बंदर को भी अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने कभी भी दोस्तों को धोखा ना देने का निर्णय लिया. तीनो एक साथ बाहों मे बाहें डालकर घूमने निकल गए.

अगले अंक के लिये अधूरी कहानी - अनोखी तरकीब

बहुत पुरानी बात है. एक अमीर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी. बहुत तलाश करने के बावजूद सामान न मिला और न ही चोर का पता चला. तब अमीर व्यापारी शहर के काजी के पास पहुँचा और चोरी के बारे में बताया.

सब कुछ सुनने के बाद काजी ने व्यापारी के सारे नौकरों और मित्रों को बुलाया. जब सब सामने पहुँच गए तो काजी ने सब को एक-एक छड़ी दी. सभी छड़ियाँ बराबर थीं. न कोई छोटी न बड़ी.

सब को छड़ी देने के बाद काजी बोला, “इन छड़ियों को आप सब अपने अपने घर ले जाएँ और कल सुबह वापस ले आएँ’’.

इस मज़ेदार काहनी आपको पूरा करके हमें dr.alokshukla@gmail.com पर भेज दीजिये. अच्छी कहानियां हम अगले अंक में प्रकाशित करेंगे.

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