आज़ाद हिन्द फौज के कौमी तराने

आज़ाद हिन्द सेना का झंडा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास आज़ाद हिन्द सेना और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के ज़ि‍क्र के बिना अधूरा है. शुरू में रासबिहारी बोस ने जापानियों की सहायता से दक्षिण-पूर्वी एशिया में करीब 40,000 भारतीयों की सेना या इन्डियन नेशनल आर्मी (INA) का गठन शुरू किया और आज़ाद हिन्द फ़ौज का नाम दिया. इस फौज की शुरुवात जापानियों व्दारा बनाए गए भारतीय युध्दबन्दि‍यों हुई. बाद में इसमें बर्मा और मलाया में रहने वाले भारतीय भी भर्ती किये गये. दिनांक 4 जुलाई 1943 को उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आज़ाद हिन्द फौज़ का सर्वोच्च कमाण्डर नियुक्त करके उनके हाथों में इसकी कमान सौंप दी. अगले दिन 5 जुलाई को नेताजी ने सिंगापुर के टाउन हाल के सामने $सुप्रीम कमाण्डर$ के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए 'दिल्ली चलो!' का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना से बर्मा, इम्फाल और कोहिमा में जमकर मोर्चा लिया. सुभाष बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी. जापान ने अंडमान व निकोबार व्दीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये. आजाद हिन्द फौज ने 4 फ़रवरी 1944 को अंग्रेजों पर दोबारा भयंकर आक्रमण किया और कोहिमा, पलेल आदि कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया. नेताजी सुभाष बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो स्टेशन प्रसारण करके जीत के महात्मा गांधी की शुभकामनाएँ माँगीं. सुभाष बोस के यह मार्मिक शब्द जो उन्होने 22 सितम्बर 1944 को शहीदी दिवस मनाते हुये कहे थे कभी भुलाए नहीं जा सकते –

हमारी मातृभूमि स्वतन्त्रता की खोज में है. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा. यह स्वतन्त्रता की देवी की माँग है.

आकाशवाणी की आर्काइव से नेताजी के 1943 के भाषण की रिकार्डिंग सुनिये

आज़ाद हिन्द फौज़ के गुमनाम शहीदों की याद में सिंगापुर के एस्प्लेनेड पार्क में आईएनए वार मेमोरियल बनाया गया था. सुभाष चन्द्र बोस ने 8 जुलाई 1945 को इस स्मारक पर जाकर अनाम सैनिकों को अपनी श्रध्दांजलि अर्पित की थी. जब ब्रिटिश सेनाओं ने सिंगापुर पर कब्ज़ा किया तो माउण्टबेटन के आदेश से इसे ध्वस्त कर दिया. इस स्मारक पर आज़ाद हिन्द फौज़ के तीन ध्येयवाचक शब्द - इत्तेफाक़ (एकता), एतमाद (विश्वास) और कुर्बानी (बलिदान) लिखे हुए थे. सिंगापुर की नेशनल हैरिटेज बोर्ड ने 1995 में वहाँ के भारतीयों के सहयोग से इण्डियन नेशनल आर्मी की बेहद खूबसूरत स्मृति पट्टिका उसी जगह स्थापित की.

सिंगापुर मे आईएनए स्मारक

आज़ाद हिन्द सेना ने मणिपुर घाटी का 1,500 वर्ग मील का क्षेत्र ब्रिटिश से मुक्त करा लिया, और दिनांक 14 अप्रेल 1944 को बहादुर ग्रुप के कमांडर कर्नल एस.ए. मलिक ने मोइरांग कंगला पर तिरंगा फहराया. इसी स्थान से पूरे मणि‍पुर का प्रशासन लगभग 3 माह तक चलाया गया. इस स्थान पर आज आई.एन.ए. का स्माारक है.

मोईरांग में आई.एन.ए. स्मारक

नवम्बर 1945 से लेकर मई 1946 तक आजाद हिन्द फौज के 17 हजार जवानों और अधिकारियों का कोर्ट-मार्शल किया गया. पहला और सबसे प्रसिध्द मुकदमा दिल्ली के लाल किले में कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरुबख्श सिंह ढ़ि‍ल्लन तथा मेजर जनरल शाहनवाज खान पर संयुक्त रूप से चला.

आज़ाद हिन्द फौज के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस

इन मुकदमों के विरोध में जनाक्रोश उबल पड़ा. लाल किले से आई आवाज- सहगल, ढिल्लन, शहनवाज़ - इस नारे ने उस आजादी के लिए लड रहे लाखों लोगों को एक सूत्र में बांध दिया. सर तेज बहादुर सप्रू के नेतृत्व में नामी वकील भूलाभाई देसाई, सर दिलीपसिंह, आसफ अली, पं॰ जवाहरलाल नेहरू, बख्शी सर टेकचंद, कैलाशनाथ काटजू, जुगलकिशोर खन्ना, सुल्तान यार खान, राय बहादुर बद्रीदास, पी.एस. सेन, रघुनंदन सरन आदि की टीम ने यह मुकदमा लड़ा. सहगल, ढिल्लन और शाहनवाज के अलावा आजाद हिन्द फौज के अन्य् सैनिक भी रिहा हो गए. अंग्रेजी सरकार के कमाण्डर-इन-चीफ सर क्लॉड अक्लनिक ने इन जवानों की उम्र कैद सजा माफ कर दी. हवा का रुख भांपकर वे समझ गए, कि अगर इनको सजा दी गई तो हिन्दुस्तानी फौज में बगावत हो जाएगी.

आज़ाद हिन्द सेना के सिपाहियों में जोश भरने के लिये बहुत से कौमी तराने बनाए गये थे. इन गीतों तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने पाबंदी लगा दी थी. आइये कुछ प्रसिध्द. गीतों के बारे में जानते हैं.

कदम-कदम बढ़ाए जा

यह आज भारतीय सेना का मार्चिंग गीत है. इस गीत को सुभाष बोस – द फारगाटेन हीरो में ए.आर.रहमान ने संगीज में पिरोया है. आइये सुनते हैं –

इस जोश भरे गीत को रामसिंह ठाकुर ने लिखा हैं. गीत के बोल नीचे दिये गये हैं-

क़दम-क़दम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा,
यह जिंदगी है कौम की, तू कौम पे लुटाए जा.

तू शेरे हिन्द आगे बढ़, मरने से फिर भी तू न डर,
उड़ा के दुश्मनों का सर, जोशे-वतन बढ़ाए जा.

तेरी हिम्मत बढ़ती रहे, खुदा तेरी सुनता रहे,
जो सामने तेरे अड़े, तो खाक में मिलाए जा.

चलो देहली पुकार के, क़ौमी निशाँ सँभाल के,
लाल किले पे गाड़ के, लहराए जा, लहराए जा.

इसी गीत को समाधि फिल्म में सी.रामचंद्र ने संगीतबध्द किया था और चितलकर जी ने गाया था –

हम देहली-देहली जाएँगे

यह खूबसूरत गीत नेताजी के दिल्ली चलो नारे पर आधारित है. इसके गीतकार मुमताज़ हुसैन और संगीतकार रामसिंह ठाकुर थे. गीत के बोल नीचे दिये गये हैं -

हम देहली-देहली जाएँगे, हम अपना हिंद बनाएँगे
अब फौजी बनके रहना है, दु:ख-दर्द, मुसीबत सहना है
सुभाष का कहना-कहना है, चलो देहली चलके रहना है

हम गोली खा के झूमेंगे, हम मौत को बढ़कर चूमेंगे
मतवाले बन आजादी के, हम दरिया जंगल घूमेंगे

सुभाष हमारा साथ ही है, और रासबिहारी साथ है
फिर कैसा ख़तरा बाकी है, खुदा हमारा साथी है

हम फौजी बन के आएँगे, हम देहली तक बचाएँगे
ज़ालिम फिरंगी क़ौम का, हम नामो-निशाँ मिटाएँगे

सुभाष बोस – द फारगाटेन हीरो में ए.आर.रहमान के संगीत में यह गीत सुनिये –

सुभाष जी सुभाष जी

इस गीत के गीतकार मुमताज़ हुसैन और संगीतकार रामसिंह ठाकुर हैं. जब सुभाष बोस 90 दिनों की खतरनाक पनडुब्बी यात्रा के बाद सिंगापुर पहुंचे तो आजदा हिन्द फौज़ ने यही गीत गाकर उनका स्वागत किया था. कलकत्ता यूथ कायर ने इस गीत को बड़ी खूबसूरती से गाया है –

सुभाष जी सुभाष जी...
वह जाने हिन्द आ गए,
है नाज़ जिस पे हिन्द को, वह जाने हिन्द आ गए

सुभाष जाने - हिन्द है, सुभाष माने हिन्द है
सुभाष आने हिन्द है, सुभाष शाने हिन्द है

कली-कली-कली-कली, अन्दलीब वह चली
गली-गली-गली-गली, वह आम हलक जा रहे

वह आने हिन्द लाएँगे, वह शाने हिन्द लाएँगे
फिरंगियों की कौम पर, वह क़हर बन के छाएँगें

खुशी का दौर आ गया, निशात बन के छा गया
वह एशिया का आफ़ताब, एशिया में आ गया
सुभाष जी, सुभाष जी...

हम भारत की बेटी हैं

हम भारत की बेटी हैं, अब उठा चुकीं तलवार
हम मरने से नहीं डरतीं, नहीं पीछे पाँव को धरतीं
आगे ही आगे बढ़तीं, कस कमर हुईं तैयार
हम भारत की बेटी...

हम नए नहीं हैं लड़ाके, देखो इतिहास उठा के
हम छत्राणी भारत की, दिखला देंगी निज वार
हम भारत की बेटी...

जब कर कृपाण उठातीं, फिर काल रूप बन जातीं
सदियों से प्यास बुझातीं थर्रा देतीं संसार
हम भारत की बेटी...

जब तक बाँहों में बल है, धमनियों में रक्त प्रबल है
दिल में नहीं पल भर कल है, बिना किए देश उद्धार
हम भारत की बेटी...

बलदेवसिंह का लिखा और रामसिंह ठाकुर का संगीत में पिरोया यह गीत रानी झांसी ब्रिगेड की कैप्टेन लक्ष्मी सहगल के प्रति सम्मान भी है, और आज़ाद हिन्द सेना की महिला फौजियों की वीरगाथा भी -

उठो सोए भारत के नसीबों को जगा दो

यह जोश भरा गीत कर्नल जी.एस. ढ़ि‍ल्लन ने लिखा था और रामसिंह ठाकुर ने संगीत दिया था, जिसे गाते हुए आज़ाद हिन्द़ सेना के बहादुर सैनिकों ने भारत के बड़े भूभाग को मुक्त कराया था. मेरा सौभाग्य‍ है कि मुझे कर्नल साहब से व्यक्तिगत रूप से मिलने का अवसर मिला, जब मैं शिवपुरी ज़ि‍ले में कलेक्टर था और कर्नल साहब वहां पर कृषि कार्य कर रहे थे. गीत के बोल हैं -

उठो सोए भारत के नसीबों को जगा दो
आजादी यूँ लेते हैं जवाँ, ले के दिखा दो

खूँखार बनो शेर मेरे हिन्दी सिपाही
दुश्मन की सफ़े तोड़ दो एक तहलका मचा दो

आ हिन्द के बदल में उदू चीज़ ही क्या है
ग़र रास्ते में हो भाई, उसे मार गिरा दो

मीनारे-कुतुब देखता है राह तुम्हारी,
चल, उसकी बुलन्दी को तिरंगे से सजा दो

कर याद शहीदों का लहू देश की खातिर
एक-दो भी दुश्मन को हजारों से लड़ा दो

क्यों लाल किला यूँ रहे दुश्मन के हवाले
हर लश्करे-हिन्दी की वहाँ धूम मचा दो।

हो भूख, हो तकलीफ़, रुकावट हो थकावट
वहाँ जख्मी गिरा मौत को भी हँस के दिखा दो।

और कोई ख्वाहिश है न तमन्ना मेरे दिल में,
आजाद वतन हिन्द में जय हिन्दँ बुला दो।

हे वीर बालकों

रामसिंह ठाकुर ने यह गीत आज़ाद हिन्द फौज के बच्चों के लिये गोर्खाली भाषा में लिखा था और इसे एक बड़ी मधुर जापानी धुन में संगीत दि‍या था.

हे वीर बालकों जाति लेई सुधार
आँधी बढ़ो हिम्मत बढ़ी लेई सिंगार
मौका हेईरी लाभ उठाई देश का करूँ उद्धार
अब ही होगा हमरो देश का उद्धार
हे वीर बालकों
अब ही हिम्मत ना हार
हे वीर बालकों...

सब ही मिल-जुलकर जय हिन्दँ पुकार
नेताजी जस ताको नाम पाने तरार
ओ ही हो नाम आचार
देश को कल्याकन
हे वीर बालकों

सब सुख-चैन की बरखा बरसे

यह आज़ाद हिन्द सेना का राष्ट्र गीत था. इसे आबिद हुसैन ने लिखा था. आइये गीत सुनें –

भारत भाग्य है जागा
पंजाब सिंध गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंग

चंचल सागर विन्घ्य हिमालय
नीला यमुना गंगा
तेरे नित गुण गाएँ
तुझ से जीवन पाएँ
सब तन पाएँ आशा सूरज बनकर जग पर चमके
भारत नाम सुभागा।

जय हो- जय हो- जय हो,
भारत नाम सुभागा।

सबके दिल में प्रीत बसाए
तेरी मीठी वाणी
हर सूबे मे रहने वाले
हर मज़हब के प्राणी
सब भेद और फ़र्क मिटा के सब गोद में तेरी आ के
गूँथें प्रेम की माला
सूरज बन के जग पर
चमके भारत नाम तुम्हारा
जय हो- जय हो- जय हो,
जय जय जय हो
भारत नाम सुभागा।

सुबह-सबेरे पंख पखेरू तेरे ही गुण गाएँ बास भरी भरपूर हवाएँ
जीवन में ऋतु लाएँ
सब मिलकर जय हिन्द पुकारे
जय आज़ाद हिन्द के नारे
प्यारा देश हमारा
सूरज बन के जग पर
चमके भारत नाम तुम्हारा
जय हो- जय हो- जय हो,जय जय जय हो
भारत नाम सुभागा

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