बाल पहेलियाँ

बूझो तो जानें -1

रचनाकार - डॉ राकेश चक्र, 90 बी,शिवपुरी, मुरादाबाद, उ.प्र .


बादल जिससे जल भर लाते,
धरती पर हरियाली लाते।
कहें उसे हम नीरनिधि भी,
देव हैं उसके वरुण कहाते।

पारावार कहें हम उसको,
जिसमें रहते जीव हजारों।
वारिधि कहकर उसे पुकारें,
नदियाँ जिस पर जीवन वारें।

पयोनिधि भी कहें सभी हम,
जो फैला है पूरे जग में।
रत्नाकर भी कहते बच्चों,
जो खारा है पग-पग-पग में।

पयोधि कहें और अब्धि भी उसको,
औ' कहें हम उसे नदीश।
अर्णव कहते, कहें उदधि हम,
और कहते हम वारीश।

नीरधि भी हम कहते बच्चों,
कहें उसको हम जलधाम।
जलधि हमारा जीवन साथी,
जिससे सँवरें खेत-ग्राम।।

उत्तर- सागर, समुद्र।

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बूझो तो जानें-2

जो हमको हँसना सिखलाते
थोड़ा-सा मुस्काना जी।
रंग-बिरंगे सारे खिलकर
गाते नया तराना जी।।

कोई कहता इन्हें मंजरी
कोई कहता इन्हें सुमन।
तितली,भौंरे इनसे खेलें
बातें करता गुनगुन मन।।

कोमल तन है पंखुड़ियों का
कितने प्यारे लगें प्रसून।
सबको ही ये खूब लुभाते
परियाँ लेकर पहुंचें मून।।

सबका हित ही ये करते हैं
प्रभु को खुद अर्पण करते।
माक्षी इनसे शहद बनाएँ
श्रद्धा से शहीद पर चढ़ते।।

बच्चों बोलो कौन सारथी
जीवन में आता है काम।
देवी-देव सभी को प्यारे
इनमें बसते कृष्णा राम।।

उत्तर-पुष्प, फूल।

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पहेलियाँ

रचनाकार- डॉ० कमलेन्द्र कुमार(प्र०अ०) प्राथमिक विद्यालय डगरु का पुरवा, कुठौंद जालौन (उ०प्र०)

1
यमुनोत्री है उदभव मेरा,
तीन अक्षर का मेरा नाम ।
गंगा की हूँ नदी सहायक,
नाम बताओ भोलूराम।।

2
उत्तर भारत मे बहने वाली,
तीन अक्षर का मेरा नाम।
लखनऊ बसा है मेरे तट पर,
नाम बताओ भोलूराम।।

3
मध्य हटे को 'कारी' हूँ मैं,
प्रथम हटे तो बनती 'वेरी'।
झटपट मेरा नाम बताओ,
बच्चों क्यों करते हो देरी।।

4
त्रयम्बक है उद्भव मेरा,
पावन मेरा तट।
चार अक्षर का नाम है मेरा,
बोलो तो झटपट।।

5
कल-कल-कल-कल बहती हूँ मैं,
शीतल मेरी धारा।
बसा अयोध्या तट पर मेरे,
बोलो नाम हमारा।

6
गोरखपुर एक शहर पुराना
बसा है,मेरे तट पर।
शीतल शीतल जल है मेरा तुम,
आओ देखो छूकर।।

7
मध्य भारत की नदी कहें सब,
यमुना में मिल जाऊँ।
बसा है कोटा मेरे तट पर,
बोलो क्या कहलाऊँ?

8
कल कल कल कल बहती रहती,
एक नदी है पावन।
उज्जैन बसा है इसके तट पर,
कुंभ लगे मनभावन।

9
सर्दी में सब चाहें मुझको,
दिनकर संग मैं आऊँ।
दो अक्षर का नाम है मेरा,
बोलो क्या कहलाऊँ?

10
है मेरे आँगन जीव जंतु,
पंछी विचरण करते।
नदियाँ, झरने कल-कल बहते,
पेड़ सदा हैं रहते।

11
सिन-का-बाब से निकल कर मैं,
सागर में मिल जाती।
बड़ी नदी सब मुझको कहते,
सदा इंडस मैं कहलाती।

12
तीन अक्षर का नाम है मेरा,
अंत हटे तो नर्म।
पश्चिम दिशि में बहती हूँ मैं,
यही है मेरा मर्म।


13
महाबलेश्वर गिरि से निकलूँ,
कल-कल करता मेरा जल।
आज बताओ प्यारे बच्चों,
क्यों करते हो परसों कल।

14
अरुणाचल में दिहांग कहें सब
बांग्लादेश में जमुना ।
रानू,राजा, अविरल, सोनू
बोलो रानी करूणा।

15
बाग बगीचों पर मैं नाचूँ,
और नाचूँ मैदानों में।
रंग बिरंगे पंख है मेरे,
नही डरूँ तूफानों में।।

16
मुझे घुमाते यमुना तट पर,
नटखट नंदकिशोर।
गोरस सबको देने वाली,
बोलो राज विभोर।।


17
सदा सत्य की राह दिखाते,
प्रज्ञा दीप जलाते हैं।
तम को दूर भगाते हरदम,
घर-घर पूजे जाते हैं।

18
तीन अक्षर का नाम मेरा,
अंत हटे 'पर' कहलाऊँ।।
खिड़की, दरवाजे में बच्चों!,
मैं हरदम पाया जाऊँ।

19
प्रथम वर्ण जब हट जाए, बन जाती हूँ कान।
हर चीज को मुझसे ले लो, करके थोड़ा ध्यान।

20
सदा बड़ों का कहना मानो,
करो बड़ो का आदर।
उतना पैर पसारो बच्चों
जितनी हो __ _।

उत्तर : उत्तर :1- यमुना, 2-गोमती,3- कावेरी, 4-गोदावरी5- सरयू नदी, 6-राप्ती नदी,7- चंबल नदी, 8-क्षिप्रा नदी, 9-धूप, 10-जंगल
11-सिंधु नदी, 12-नर्मदा, 13-कृष्णा नदी, 14-ब्रह्मपुत्र 15- मोर, 16-गाय, 17-गुरु जी, 18-परदा,19-दुकान, 20-चादर

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बाल पहेलियाँ

रचनाकार-गौरीशंकर वैश्य विनम्र,आदिलनगर, विकासनगर, लखनऊ


1
जोड़ - घटाना, गुणा - भाग है
मेरे बाएँ हाथ का काम ।
कभी नहीं गलती करता हूँ
मित्र! बताओ मेरा नाम।

2
रानी पास अठारह घोड़े
नौ काले हैं. नौ ही सफेद।
घुड़सवार घोड़े दौड़ाता
नहीं किसी में करता भेद।

3
आगे-पीछे मैं हूँ साथ
नहीं किसी के आऊँ हाथ।
अँधियारे में नजर न आऊँ
कहीं अकेले कभी न जाऊँ।

4
बनी बुढ़ापे की साथी है
धीरे-धीरे साथ चले।
कुत्तों को तो मार भगाती
और किसी को नहीं खले।

5
किसी धातु या कागज का हूँ
मूल्यवान छोटा टुकड़ा।
सभी चाहते हाथ आऊँ
पाकर खिल जाता मुखड़ा।

6
एक से बारह तक गिन पाए।
चौबिस घंटे चलती जाए।
'टिक - टिक, टिक - टिक करती रहती
बुद्धिमान जो नाम बताए।

7
तन पर उगते पेड़ कमाल।
न कोई पत्ता, न कोई डाल।
काटो फिर भी बढ़ते जाएँ।
सिर पर सिक्का खूब जमाएँ।

उत्तर - 1 कैल्कुलेटर 2 कैरम 3 परछाईं 4 छड़ी 5 रुपया, 6 घड़ी 7 बाल

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बाल पहेलियाँ

रचनाकार -प्रीतम कुमार साहू, शिक्षक, कुरुद, भिलाई, दुर्ग

1
रात में जगता,दिन में सोता,
कौआ,कोयल,ना वह तोता
‘उ’ से उनका नाम है आता
बतलाओ वह क्या कहलाता..?
2
पैर नहीं पर चलता हूँ मैं
ना खाता,ना पीता हूँ मैं
‘पे’ से मेरा नाम है आता
बतलाओ मैं क्या कहलाता.. ?
3
तीन पंख है उनके शरीर पर
आसमान में उड़ता नहीं पर
‘प’ से उनका नाम है आता
बतलाओं वह क्या कहलाता.. ?
4
एक फूल,सौ फल लगते है
फल में बीज नहीं रहते है
“के”से उनका नाम है आता
बतलाओं वह क्या कहलाता.. ?

5
शेर नहीं,पर दिखती वैसी वो
हम सब की है मौसी वो
“बि “से उनका नाम है आता
बतलाओं वह क्या कहलाता. ?

(1.उल्लू,2,पेन्सिल,3,पंखा,4केला,5,बिल्ली)

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जनउला

रचनाकार - एस कुमार सारथी, सहायक शिक्षक प्रा.शा. जेवरीडीह, पुसौर, जिला- रायगढ़


1 धंधा रे धंधा तोर दुनों मुड़ी चंदा।
2 ऊपर पचरी तरी पचरी माझा म मोंगरी मछरी।
3 नान कन टूरी कूद कूद के पार बांधे।
4 आय लुलु जाय लुलु पानी ल डराय लुलु
5 आघु कतिले रानी पिछु कतिले पिए पानी
6 नान कन टूरी हरियर फीता गथाएं।
7 सूखा डबरी म केकड़ा फड़फड़ाए।
8 नान कन टूरी ए मुंह म जाए ले छुरी ए।
9 कारी बन न रहे लाल पानी पिए।
10 नाव के ऊपर नदी,नदी के ऊपर

उत्तर =1. माँदर, 2.जीभ, 3 सुई धागा, 4 जूता, 5 दिया, 6 मूली, 7 लाई, 8 मिर्च, 9जुंआ, 10 आंख

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