हमारे चारों ओर के परिवर्तन


इस अध्याय को पढ़ाने की बहुत सी गतिविधियां पाठ्य पुस्तक में दी हुई हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम यह गितिविधियां या अन्य कोई गतिविधियां कक्षा में बच्चोंं से करवाएं जिससे वे परिवर्तन के संबंध में अच्छी तरह से समझ जायें।


सबसे पहले तो हमें बच्चों को यह बताना होगा कि परिवर्तन संसार का नियम है और हमारे चारों ओर लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। बच्चों को बताया जा सकता है कि वे स्वयं ही परिवर्तन का उदाहरण हैं। कुछ वर्ष पहले वे छोटे थे। अब वे धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। उनकी लंबाई बढ़ रही है। वे पहले की अपेक्षा अधिक कार्य कर सकते हैं, अदि। इसी प्रकार हम अपने चारों ओर के अन्य परिवर्तनों की बात कर सकते हैं। दिन और रात का होना, मौसम का बदलना, आग का जलना, खाना पकाया जाना, आदि।


तीव्र और मंद परिवर्तन यहां पर हम अनेक उदाहरण दे सकते हैं और बच्चों  से भी उदाहरण देने के लिये कह सकते हैं। परिवर्तन तीव्र होगा या मंद यह  इस बात पर निर्भर करता है कि परिवर्तन के कारण हमारे आस-पास कितनी मात्रा में मौजूद हैं। उदाहरण के गीले कपड़े को सुखाने के लिये उसे धूप में टांगा जाता है जिससे धूप की गर्मी से कपड़ो का पानी अधिक तीव्र गति से भाप बनता है। हम यदि कसरत करें तो हमें जल्दी पसीना आने लगता है। इस प्रकार के उदाहरण देकर हम बता सकते हैं कि परिर्वतन की गति को नियंत्रित किया जा सकता है।


उत्क्रमणीय और अनुत्क्रपणीय परिवर्तन - यहां पर सरल भाषा में यह बताने की आवश्यकता है कि कुछ परिवर्तन ऐसे होते है जिन्हें वापस किया जा सकता है। उदाहरण के लिये एक रबर बैंड को खींचकर लंबा किया जा सकता है और उसे छोड़ देने पर वह पूर्व अवस्था में आकर फिर छोटी हो जाती है। गुब्बारो में हवा भरकर उन्हें फुलाया जा सकता है, और हवा निकल जाने पर वे अपने पूर्व रूप में आ जाते हैं।



केतली में पानी गर्म करने पर भाप निकलती है। इस भाप के सामने कोई ठंडी प्लेाट रखने पर भाप दोबारा पानी में बदल जाती है। यह उत्क्रमणीय परिवर्तनों के उदाहरण हैं।


परंतु सभी परिवर्तन वापस नहीं किये जा सकते। बच्चे एक बार बड़े होने के बाद पुन: छोटे नहीं हो सकते। कच्चे चावल को उबाल कर पका लेने के बाद उसे वापस कच्चा नहीं बनाया जा सकता। कागज़ के जल जाने पर बनी हुई राख से फिर से कागज़ नहीं बनाया जा सकता। यह‍ अनुत्क्रमणीय परिवर्तनो के उदाहरण हैं।


आवर्ती और अनावर्ती परिवर्तन – आवर्ती का अर्थ है कि यह परिवर्तन एक निश्चि‍त समय अवधि के पश्चात फिर से होते हैं। इस प्रकार जो परिवर्तन निश्चित समय में दोहराये जाते हें वे आवर्ती कहलाते हैं। उदाहरण के लिये दिन और रात को होना एक आवर्ती परिवर्तन है। एक रस्सी में को भारी वस्तु बांध कर उसे खूंटी से लटकाकर पेंडुलम बनाया जा सकता है और बच्चों को दिखाया जा सकता है कि पेंडुलम किस प्रकार आवर्ती गति करता है।



जो परिवर्तन निश्चि‍त समय मे बार-बार नहीं होते उन्हें अनावर्ती कहते हैं। जैसे यदि हमने एक गिलास को उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखा और फिर उसे वहीं रखा रहने दिया तो इसे अनावर्ती परिवर्तन कहेंगे। बच्चों से अपने आस-पास के आवर्ती और अनावर्ती परिवर्तनो के उदाहरण देने को कहें।


वांछनीय और अवांछनीय परिवर्तन – जो परिवर्तन हम चाहते हैं वे वांछनीय हैं और जो हम नहीं चाहते वे अवांछनीय हैं। कभी कभी वातावरण के अनुसार कोई परिवर्तन वांछनीय या अवांछनीय हो सकता है। उदाहरण के लिये वर्षा का होना वांछनीय हैं क्योंकि यह फसलों के लिये आवश्यक है, परंतु अति वर्षा अवांछनीय है क्योकि इससे बाढ़ आ सकती है। यह भी हो सकता है कि कोई परिवर्तन किसी व्यक्ति के लिये वांछनीय हो और किसी अन्य के लिये अवांछनीय हो। उदाहरण के लिये किसी दिन वर्षा होने से किसान प्रसन्न हो सकते हैं, परंतु उसी दिन यदि बच्चों की परीक्षा है और वर्षा के कारण वे परीक्षा देने न जा सकें तो यह वर्षा उन बच्चों के लिये अवांछनीय है। बच्चों से कक्षा में वांछनीय और अवांछनीय परिवर्तनों के उदाहरण पूछें।


भौतिक और रासायनिक परिवर्तनभौतिक परिवर्तन उन्हें कहते हैं जिनमें पदार्थ किसी अन्य पदार्थ में नहीं बदलता अत: उसके गुण वही रहते हें जो परिवर्तन के पूर्व थे। हां यदि किसी भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की अवस्था बदल जाये तो उसके कुछ भौतिक गुणों में परिवर्तन हो सकता है। जैसे बर्फ को गर्म करने पर पानी बनता है और पानी को गर्म करने पर वाष्प बनती है। बर्फ, जल और वाष्प पानी की ही अलग-अलग अवस्थाएं हैं इसलिये इन तीनो में ही पानी के गुण मिलते हैं, परंतु बर्फ ठोस है, जल द्रव है और वाष्प गैस है। यदि हम चाक को छोटे टुकड़ो में तोड़ते हैं तो भी सभी टुकड़ों में चाक के ही गुण होते हें और हम इन सभी टुकड़ों से बोर्ड पर लिख सकते हैं।


रासायनिक परिवर्तन में रासायनिक क्रिया होने से पदार्थ किसी अन्य पदार्थ में बदल जाता है जिसके गुण भी पूरी तरह से अलग होते हैं। उदाहरण के लिये यदि हम चाक को किसी गिलास में रखकर उस पर कोई अम्ल डालें तो कार्बन डाई आक्साेइड गैस के बुलबुले उत्पन्न होते हैं और चाक एक अवशिष्ट में बदल जाता है तो चाक से पूरी तरह से भिन्न दिखाई पड़ता है। इसी प्रकार हम माचिस की तीली को जलाकर या कागज़ को जलाकर रासायनिक परिवर्तन दिखा सकते हैं।



परिवर्तन में ऊर्जा अंतर्निहित होती है – परिवर्तन करने में ऊर्जा का उपयोग होता है। जब हम चाक को तोड़ते हैं तो अपने हाथ की ऊर्जा का उपयोग करते हैं। जब बर्फ से पानी बनता है तो ऊष्मा अवशोषित होती है। रासायनिक परिवर्तनों में भी या तो ऊर्जा अवशोषित होती है या फिर उत्सर्जित होती है। उदाहरण के लिये कागज़ को जलाने में ऊष्मा का अवशोषण होता है और यदि हम चूने पर पानी डालें तो रासायनिक क्रिया होती है और ऊष्मा निकलती है। हम स्कूल में बच्चों को यह सब गतिविधियां करके दिखा सकते हैं।


इस अध्याय को पढ़ाने के लिये हम बच्चों  के साथ अनेक गतिविधियां कर सकते हैं। बच्चों  से विभिन्न प्रकार के परिवर्तनो की सारणी बनाने को कहा जा सकता है। इसके अतिरिक्त उनसे विभिन्न परिवर्तनो को दिखाने के लिये पोस्टर बनवाये जा सकते हैं –



पोस्टर के अतिरिक्त कोलाज आदि भी बनवाये जा सकते हैं –



परिवर्तनो के विषय में समझाने के लिये प्रयोग देखें नीचे के वीडियो में -



एक वीडियो हिन्‍दी में -


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